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Shardiya Navratri 2026: तिथि, कलश स्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और कैलेंडर

Shardiya Navratri 2026 का पर्व मां दुर्गा की आराधना, व्रत, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है। इन दिनों भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा मंगल की कामना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होती है, जबकि अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन, हवन तथा विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू है, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है, नवरात्रि का पूरा कैलेंडर क्या है और व्रत का पारण कब करना चाहिए, तो इस लेख में आपको इन सभी विषयों की जानकारी मिलेगी।

इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगी। दिल्ली के पंचांग के अनुसार घटस्थापना का प्रमुख मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक है। अष्टमी और नवमी की पूजा की तारीखों को लेकर तिथि के विशेष संयोग के कारण अलग-अलग कैलेंडरों में अंतर दिखाई दे सकता है, इसलिए व्रत और पूजा के लिए स्थानीय पंचांग को देखना जरूरी है।

महत्वपूर्ण: इस ब्लॉग में दी गई धार्मिक जानकारी गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के संस्थापक, पुराण मनीषी पूज्य श्री कौशिक जी महाराज जी के अनुसार प्रस्तुत की गई है। अलग-अलग परंपराओं, पंचांगों और स्थान के अनुसार विधि एवं मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी और कब समाप्त होगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का समापन विजयादशमी के पर्व के साथ होता है।

शारदीय नवरात्रि 2026 की प्रमुख तारीखें:

  1. नवरात्रि प्रारंभ (Navratri start date 2026) : रविवार, 11 अक्टूबर 2026

  2. कलश स्थापना: रविवार, 11 अक्टूबर 2026

  3. दुर्गा अष्टमी: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

  4. महानवमी (Navratri end date 2026) : सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पूजा; नवमी तिथि मंगलवार, 20 अक्टूबर तक

  5. विजयादशमी: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

इस वर्ष सप्तमी तिथि दो सूर्योदय तक रहने के कारण अष्टमी और नवमी की पूजा की तिथियों में विशेष स्थिति बन रही है। उत्तर भारत में प्रचलित पंचांग के अनुसार दोनों पूजाएं 19 अक्टूबर को की जा सकती हैं, जबकि बंगाल की कुछ परंपराओं में महानवमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसलिए अष्टमी व्रत, नवमी हवन और पारण के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग या पुरोहित का मार्गदर्शन लें।

2. शारदीय नवरात्रि 2026 की तिथि और पूरा कैलेंडर

शारदीय नवरात्रि के दौरान प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशेष स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। नीचे दिया गया कैलेंडर उत्तर भारत में प्रचलित नवरात्रि पूजा के अनुसार तैयार किया गया है।

दिन और तारीख दिन पूजा और विशेषता
11 अक्टूबर 2026 रविवार घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा
12 अक्टूबर 2026 सोमवार मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
13 अक्टूबर 2026 मंगलवार मां चंद्रघंटा की पूजा
14 अक्टूबर 2026 बुधवार मां कूष्मांडा की पूजा
15 अक्टूबर 2026 गुरुवार मां स्कंदमाता की पूजा
16 अक्टूबर 2026 शुक्रवार मां कात्यायनी की पूजा
17 अक्टूबर 2026 शनिवार मां कालरात्रि की पूजा
18 अक्टूबर 2026 रविवार सप्तमी तिथि जारी रहने के कारण स्थानीय पंचांग देखें
19 अक्टूबर 2026 सोमवार दुर्गा अष्टमी और महानवमी की विशेष पूजा
20 अक्टूबर 2026 मंगलवार नवमी तिथि का समापन और विजयादशमी


ध्यान दें: यह कैलेंडर पूजा की प्रमुख तारीखें बताने के लिए है। इस वर्ष तिथियों की अवधि सामान्य नौ-दिवसीय क्रम से अलग है। नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहने का समय दिल्ली के पंचांग में दिया गया है। क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार पूजा, हवन और व्रत पारण का निर्णय अलग हो सकता है।

3. नवरात्रि के पहले दिन Navratri Kalash Sthapana 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

कलश स्थापना को घटस्थापना भी कहा जाता है। यह नवरात्रि के पहले दिन की जाने वाली प्रमुख धार्मिक क्रिया है। मान्यता है कि Navratri Kalash Sthapana 2026 के साथ मां दुर्गा का आह्वान करके नौ दिनों की पूजा आरंभ की जाती है।

रविवार, 11 अक्टूबर 2026 के घटस्थापना मुहूर्त (दिल्ली के पंचांग के अनुसार):

  1. प्रमुख शुभ मुहूर्त: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक

  2. अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

  3. प्रतिपदा तिथि आरंभ: शनिवार, 10 अक्टूबर को रात 9:19 बजे

  4. प्रतिपदा तिथि समाप्त: रविवार, 11 अक्टूबर को रात 9:30 बजे

समय स्थानीय पंचांग और पूजा की परंपरा के अनुसार बदल सकता है। इसलिए Mathura, Vrindavan या अन्य स्थानों पर घटस्थापना करने से पहले स्थानीय समय की पुष्टि कर लें।

Navratri Kalash Sthapana  के लिए सुबह का निर्धारित मुहूर्त प्राथमिकता से चुनें। पूजा स्थान साफ करके मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखें। यदि सुबह के मुहूर्त में स्थापना संभव न हो, तो अपने पंचांग के अनुसार उपयुक्त वैकल्पिक समय चुनें।

4. Shardiya Navratri 2026: घटस्थापना की सही विधि क्या है?

नवरात्रि में घटस्थापना करने के लिए बहुत अधिक जटिल व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धा, स्वच्छता और परिवार की पूजा परंपरा के अनुसार इसे किया जा सकता है।

घटस्थापना की सामान्य विधि इस प्रकार है:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें।

  2. पूजा चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा तस्वीर रखें।

  3. एक साफ पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ बोएं। जौ को नवरात्रि के दौरान नियमित रूप से थोड़ा पानी दें।

  4. तांबे, पीतल या मिट्टी के साफ कलश में जल भरें। उसमें गंगाजल, सुपारी, अक्षत और सिक्का आदि अपनी परंपरा के अनुसार डालें।

  5. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और उसके ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल स्थापित करें।

  6. कलश को जौ वाले पात्र के पास स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान करें।

  7. रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

  8. दुर्गा मंत्र का जाप करें, आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

कलश को स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें। पूजा की विधि अलग-अलग परिवारों में भिन्न हो सकती है, इसलिए कुल परंपरा का पालन करना उचित है।

5. Navratri Kalash Sthapana 2026 के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

घटस्थापना से पहले सामग्री एकत्रित कर लेने से पूजा के समय जल्दबाजी नहीं होती। सामान्य रूप से निम्नलिखित वस्तुओं की जरूरत पड़ सकती है।

कलश स्थापना सामग्री सूची:

  1. मिट्टी और जौ

  2. साफ कलश और जल

  3. गंगाजल

  4. आम या अशोक के पत्ते

  5. नारियल और लाल कपड़ा

  6. रोली, कुमकुम और अक्षत

  7. फूल और फूलों की माला

  8. धूप, दीपक, घी और रुई की बत्ती

  9. सुपारी, सिक्का और इलायची

  10. मौली या कलावा

  11. फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य

  12. मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा

  13. पूजा की चौकी और आसन

परिवार की परंपरा के अनुसार कुछ अतिरिक्त सामग्री भी लग सकती है। हवन और कन्या पूजन की सामग्री अलग से तैयार करना बेहतर रहता है।

👉 शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें और पूजा की विधि को बेहतर तरीके से समझने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें।
 


6. Shardiya Navratri 2026 : नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है। हर स्वरूप का अपना धार्मिक महत्व है।

  1. मां शैलपुत्री: नवरात्रि के पहले दिन पूजा की जाती है। इन्हें शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

  2. मां ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन इनकी आराधना होती है। इनका स्वरूप तप, संयम और साधना से जुड़ा है।

  3. मां चंद्रघंटा: तीसरे दिन पूजा की जाती है। भक्त साहस और निर्भयता की कामना करते हैं।

  4. मां कूष्मांडा: चौथे दिन इनकी पूजा होती है। इन्हें सृष्टि की ऊर्जा से संबंधित माना जाता है।

  5. मां स्कंदमाता: पांचवें दिन पूजा की जाती है। भक्त संतान की सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

  6. मां कात्यायनी: छठे दिन इनकी आराधना होती है। इन्हें शक्ति और साहस का स्वरूप माना जाता है।

  7. मां कालरात्रि: सातवें दिन पूजा की जाती है। भक्त भय और नकारात्मकता से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

  8. मां महागौरी: अष्टमी की पूजा में इनका विशेष महत्व है। इन्हें शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

  9. मां सिद्धिदात्री: नवमी के दिन इनकी पूजा की जाती है। भक्त ज्ञान, सिद्धि और मंगल की कामना करते हैं।

इस वर्ष तिथियों के विशेष क्रम के कारण सातवीं तिथि 17 और 18 अक्टूबर दोनों सूर्योदय पर रह सकती है। इसलिए देवी के स्वरूप की पूजा करते समय स्थानीय पंचांग और अपनी परंपरा का ध्यान रखें।

7. शारदीय नवरात्रि 2026 में नौ दिनों के रंग कौन-से हैं?

Navratri 2026 में प्रत्येक दिन अलग रंग के कपड़े पहनने की परंपरा लोकप्रिय है। कई लोग दिन के अनुसार रंग चुनते हैं, जबकि कुछ परिवारों में यह परंपरा नहीं भी होती। रंगों की सूची क्षेत्रीय मान्यताओं और पंचांगों के अनुसार अलग हो सकती है।

नवरात्रि में प्रचलित रंगों के कुछ उदाहरण हैं:

  1. पहला दिन: सफेद

  2. दूसरा दिन: लाल

  3. तीसरा दिन: रॉयल ब्लू

  4. चौथा दिन: पीला

  5. पांचवां दिन: हरा

  6. छठा दिन: ग्रे

  7. सातवां दिन: नारंगी

  8. आठवां दिन: मोरपंखी हरा

  9. नौवां दिन: गुलाबी

महत्वपूर्ण: यह एक प्रचलित रंग-सूची का उदाहरण है, सार्वभौमिक या सभी पंचांगों में मान्य सूची नहीं। वर्ष 2026 में नौ पूजा दिनों की गणना पर तिथि का प्रभाव पड़ने के कारण दिन-विशेष के रंग चुनने से पहले अपने क्षेत्र में प्रचलित कैलेंडर देख लें। मां दुर्गा की पूजा में वस्त्रों के रंग से अधिक श्रद्धा और स्वच्छता को महत्व दिया जाता है।

8. नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा को कौन-सा भोग लगाएं?

Shardiya Navratri 2026 में मां दुर्गा को फल, मिठाई और सात्त्विक भोजन अर्पित किया जाता है। अलग-अलग देवी स्वरूपों के लिए अलग भोग लगाने की परंपराएं मिलती हैं। नीचे सामान्य रूप से प्रचलित भोग के उदाहरण दिए गए हैं।

देवी का स्वरूप भोग के उदाहरण
मां शैलपुत्री घी या घी से बनी मिठाई
मां ब्रह्मचारिणी मिश्री और फल
मां चंद्रघंटा दूध या दूध से बनी मिठाई
मां कूष्मांडा मालपुआ या मीठा प्रसाद
मां स्कंदमाता केला और अन्य फल
मां कात्यायनी शहद या मीठा प्रसाद
मां कालरात्रि गुड़ या गुड़ से बना प्रसाद
मां महागौरी नारियल या नारियल से बनी मिठाई
मां सिद्धिदात्री हलवा, पूरी या फल


भोग तैयार करते समय साफ-सफाई रखें और प्याज-लहसुन रहित सात्त्विक भोजन बनाने की पारिवारिक परंपरा हो तो उसका पालन करें। भोग अर्पित करने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है।

9. नवरात्रि की दैनिक पूजा विधि क्या है?

Shardiya Navratri 2026  के नौ दिनों में नियमित पूजा करना भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुशासन का हिस्सा है। हर दिन बहुत लंबी पूजा करना जरूरी नहीं; अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।

दैनिक पूजा का सामान्य क्रम:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. पूजा स्थल को साफ करें और मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं।

  3. फूल, रोली, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।

  4. उस दिन पूजी जाने वाली देवी के स्वरूप का ध्यान करें।

  5. दुर्गा चालीसा, दुर्गा मंत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ अपनी क्षमता के अनुसार करें।

  6. मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद बांटें।

  7. शाम को पूजा स्थल पर दीपक जलाकर आरती या मंत्र जाप करें।

यदि आपने अखंड ज्योति जलाई है, तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था और नियमित निगरानी रखें। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, संयम और स्वच्छता है।

10. शारदीय नवरात्रि में व्रत रखने के नियम क्या हैं?

Shardiya Navratri 2026 का व्रत धार्मिक आस्था के साथ-साथ आत्मसंयम का अभ्यास भी माना जाता है। कुछ लोग पूरे नौ दिनों का व्रत रखते हैं, जबकि कुछ भक्त पहले और अंतिम दिन या अष्टमी-नवमी पर उपवास करते हैं।

व्रत रखते समय इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  1. व्रत शुरू करने से पहले अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लें।

  2. सात्त्विक भोजन करें और नशे से दूर रहें।

  3. पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य के लिए समय निकालें।

  4. क्रोध, विवाद और अनावश्यक तनाव से बचने का प्रयास करें।

  5. व्रत के दौरान पर्याप्त पानी पिएं, यदि आपकी व्रत परंपरा इसकी अनुमति देती है।

  6. कमजोरी या अस्वस्थता होने पर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

हर व्यक्ति के लिए कठोर उपवास जरूरी नहीं है। व्रत की विधि और भोजन संबंधी नियम परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।

11. Shardiya Navratri 2026 :नवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए?

Navratri 2026 व्रत में आमतौर पर फलाहार और सात्त्विक भोजन किया जाता है। व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री परिवार की परंपरा के अनुसार चुनी जाती है।

व्रत में खाए जाने वाले सामान्य खाद्य पदार्थ:

  1. फल जैसे केला, सेब, पपीता और अनार

  2. दूध, दही और अन्य उपयुक्त दुग्ध पदार्थ

  3. साबूदाना

  4. कुट्टू का आटा

  5. सिंघाड़े का आटा

  6. राजगिरा

  7. आलू और शकरकंद

  8. मूंगफली और मखाने

  9. सेंधा नमक, यदि आपकी परंपरा में स्वीकार्य हो

आमतौर पर जिन चीजों से परहेज किया जाता है:

  1. सामान्य नमक, यदि व्रत में सेंधा नमक का नियम हो

  2. गेहूं, चावल और सामान्य अनाज

  3. प्याज और लहसुन

  4. मांसाहार और शराब

  5. बहुत अधिक तला हुआ या अत्यधिक मीठा भोजन

हर घर में व्रत के नियम समान नहीं होते। पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय सामग्री की जांच करें। मधुमेह, गर्भावस्था या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या में लंबे समय तक भूखे रहने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।

12. नवरात्रि व्रत पारण 2026 कब करें? जानें सही तिथि, समय और विधि

व्रत पारण का अर्थ है उपवास समाप्त करके भोजन ग्रहण करना। Shardiya Navratri 2026 में पारण की तिथि इस बात पर निर्भर करती है कि भक्त अष्टमी या नवमी में से किस दिन व्रत रखते हैं और उनकी पारिवारिक परंपरा क्या है।

2026 में दिल्ली के पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे समाप्त होती है। इसी कारण उत्तर भारत की कुछ परंपराओं में नवमी पूजा और व्रत पारण 20 अक्टूबर को किया जा सकता है। वहीं कुछ परंपराओं में अष्टमी और नवमी की पूजा 19 अक्टूबर को ही की जाती है।

पारण के लिए सामान्य मार्गदर्शन:

  1. अष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त अपनी परंपरा के अनुसार अष्टमी पूजा और कन्या पूजन के बाद पारण कर सकते हैं।

  2. Navratri 2026 का व्रत रखने वाले भक्त नवमी पूजा और निर्धारित धार्मिक कर्म पूरे करके पारण करें।

  3. यदि परिवार में नौ दिन का व्रत विजयादशमी तक रखने की परंपरा है, तो उसी के अनुसार पारण करें।

  4. पारण में फल, हल्का सात्त्विक भोजन या परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।

ध्यान दें: सभी भक्तों के लिए एक ही पारण समय लागू नहीं होता। 2026 में तिथियों की विशेष स्थिति के कारण स्थानीय पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित है।

13. Shardiya Navratri 2026 में अखंड ज्योति जलाने के क्या नियम हैं?

अखंड ज्योति  Navratri 2026 में मां दुर्गा की आराधना से जुड़ी एक प्रचलित परंपरा है। कई परिवार पहले दिन कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक जलाते हैं और उसे नवरात्रि के दौरान लगातार प्रज्वलित रखने का संकल्प लेते हैं।

अखंड ज्योति जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें:

  1. दीपक को स्थिर, साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें।

  2. उपयुक्त दीपक में घी या परंपरा के अनुसार तेल का इस्तेमाल करें।

  3. पर्याप्त मात्रा में बाती और ईंधन की व्यवस्था रखें।

  4. दीपक को पर्दे, कागज, कपड़े और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।

  5. घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हों तो अतिरिक्त सावधानी बरतें।

  6. दीपक की निगरानी के लिए किसी जिम्मेदार व्यक्ति की व्यवस्था करें।

अखंड ज्योति जलाना हर परिवार के लिए अनिवार्य नहीं है। यदि सुरक्षित व्यवस्था संभव न हो, तो सामान्य दीपक जलाकर भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए।

14. दुर्गा सप्तशती का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

दुर्गा सप्तशती मां दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है। Navratri के दौरान कई भक्त इसका पाठ करते हैं। कुछ लोग प्रतिदिन एक निश्चित भाग पढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग पूरे नौ दिनों में संपूर्ण पाठ पूरा करते हैं।

दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए सामान्य सुझाव:

  1. सुबह स्नान के बाद शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठें।

  2. मां दुर्गा का ध्यान करके पूजा का संकल्प लें।

  3. अपनी परंपरा के अनुसार प्रारंभिक प्रार्थना, कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक का पाठ करें।

  4. दुर्गा सप्तशती के अध्याय निर्धारित क्रम में पढ़ें।

  5. पाठ पूरा होने पर देवी की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।

यदि संस्कृत का पाठ कठिन लगता है, तो अर्थ सहित पाठ सुनना या पढ़ना भी उपयोगी हो सकता है। संपूर्ण विधि का पालन करना चाहते हैं तो किसी जानकार पुरोहित से मार्गदर्शन लें। पाठ के अध्यायों को अपनी सुविधा के अनुसार बांटने से पहले अपनी धार्मिक परंपरा को समझ लें।

15. शारदीय नवरात्रि 2026 में दुर्गा अष्टमी कब है?

दुर्गा अष्टमी, जिसे महाष्टमी भी कहा जाता है, मां दुर्गा की पूजा का एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन मां महागौरी की आराधना, विशेष भोग, दुर्गा पूजा और कन्या पूजन की परंपरा है।

2026 में दुर्गा अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर को है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:29 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:51 बजे समाप्त होती है। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाती है।

इस वर्ष अष्टमी और नवमी की तिथियों का संयोग होने के कारण कई स्थानों पर दोनों की पूजा 19 अक्टूबर को की जा सकती है।

अष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान करके मां महागौरी की पूजा करते हैं। इसके बाद कन्या पूजन, भोग और आरती की जाती है। कुछ परिवार इस दिन हवन करके व्रत पूरा करते हैं, जबकि अन्य परिवार नवमी पर ये धार्मिक कार्य करते हैं।

16. महा नवमी 2026 कब है और इस दिन क्या करना चाहिए?

महानवमी Shardiya Navratri 2026 की प्रमुख तिथियों में से एक है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और कई परिवार हवन, कन्या पूजन तथा व्रत समापन करते हैं।

दिल्ली के पंचांग के अनुसार महानवमी की पूजा सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को की जा सकती है। नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:51 बजे शुरू होकर मंगलवार, 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे समाप्त होगी।

महानवमी पर भक्त निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

  1. मां सिद्धिदात्री की पूजा और आरती।

  2. अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती या दुर्गा मंत्र का पाठ।

  3. कन्या पूजन और भोजन।

  4. नवमी हवन और पूर्णाहुति।

  5. परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना और दान।

कुछ क्षेत्रों में नवमी पूजा 20 अक्टूबर को भी की जाती है। खासकर बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में महानवमी की तिथि अलग हो सकती है। इसलिए पूजा की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग देखें।

17. Shardiya Navratri 2026 में कन्या पूजन कब करें और इसकी विधि क्या है?

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कन्या पूजन को कंजक पूजा भी कहा जाता है। इस परंपरा में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। कई परिवार अष्टमी पर, जबकि कुछ नवमी पर कन्या पूजन करते हैं।

2026 में दुर्गा अष्टमी और महानवमी की पूजा के लिए 19 अक्टूबर, सोमवार, प्रमुख तिथि है। उत्तर भारत में इस दिन कन्या पूजन किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में नवमी तिथि के अनुसार पूजा करने की परंपरा है, तो 20 अक्टूबर को नवमी तिथि समाप्त होने से पहले के स्थानीय मुहूर्त की पुष्टि करें।

कन्या पूजन की सामान्य विधि:

  1. कन्याओं को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित करें।

  2. उनके बैठने के लिए साफ आसन तैयार करें।

  3. परंपरा के अनुसार उनके पैर धोएं और तिलक लगाएं।

  4. उन्हें हलवा, पूरी, चना और अन्य सात्त्विक भोजन परोसें।

  5. कन्याओं को फल, दक्षिणा या उपयोगी उपहार दें।

  6. उनसे आशीर्वाद लेकर सम्मानपूर्वक विदा करें।

कई परिवार नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी आमंत्रित करते हैं। यह स्थानीय परंपरा का हिस्सा है, सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नियम नहीं। कन्याओं के साथ सम्मान और सहजता का व्यवहार करना सबसे महत्वपूर्ण है।

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18. कन्या पूजन के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?

कन्या पूजन से पहले आवश्यक सामग्री तैयार कर लेने से व्यवस्था आसान रहती है। सामग्री की सूची परिवार की परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

  1. साफ आसन

  2. रोली और कुमकुम

  3. अक्षत और फूल

  4. पूजा की थाली

  5. हलवा, पूरी और काले चने

  6. फल और मिठाई

  7. जल और हाथ-पैर साफ करने के लिए आवश्यक सामग्री

  8. दक्षिणा या छोटे उपहार

  9. प्रसाद रखने के लिए साफ बर्तन

भोजन ताजा और स्वच्छ होना चाहिए। कन्याओं की पसंद, उम्र और भोजन संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखें। पूजन में किसी प्रकार का दिखावा करने की आवश्यकता नहीं है; श्रद्धा और सम्मान को प्राथमिकता दें।

19. Shardiya Navratri 2026 में हवन कब करें और इसकी सही विधि क्या है?

Navratri हवन को पूजा का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। कई परिवार अष्टमी या नवमी के दिन हवन करते हैं। कुछ लोग प्रतिदिन छोटी अग्नि-आहुति देते हैं, जबकि कुछ परिवार अंतिम दिन ही हवन का आयोजन करते हैं।

2026 में अष्टमी और नवमी की पूजा का प्रमुख दिन 19 अक्टूबर माना जा रहा है। नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहने के कारण नवमी हवन का समय परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करना चाहिए।

हवन की सामान्य प्रक्रिया:

  1. हवन स्थल को साफ करके अग्निकुंड तैयार करें।

  2. मां दुर्गा की पूजा और संकल्प करें।

  3. हवन सामग्री, घी, समिधा और अन्य आवश्यक सामग्री तैयार रखें।

  4. जानकार पुरोहित के मार्गदर्शन में निर्धारित मंत्रों के साथ आहुतियां दें।

  5. अंत में पूर्णाहुति करके मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद बांटें।

हवन हमेशा सुरक्षित और हवादार स्थान पर करें। अग्नि को अकेला न छोड़ें और पास में पानी या उपयुक्त अग्निशमन साधन रखें। घर में हवन करने की स्थिति में आग से संबंधित सावधानियों का विशेष ध्यान रखें।

20. शारदीय नवरात्रि क्यों मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?

Shardiya Navratri  को शक्ति की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। इसी कारण नवरात्रि में देवी शक्ति की पूजा की जाती है।

नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त पूजा, व्रत, मंत्र जाप, दान और सेवा के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करते हैं। यह समय अपने व्यवहार पर ध्यान देने, परिवार के साथ धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का अवसर भी है।

शारदीय नवरात्रि का महत्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप शक्ति, साहस, ज्ञान, करुणा और संयम जैसे गुणों की याद दिलाते हैं। विजयादशमी के साथ यह पर्व अधर्म पर धर्म की विजय के संदेश को आगे बढ़ाता है।

21. विजयादशमी 2026 कब है और नवरात्रि के बाद क्या किया जाता है?

विजयादशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, शारदीय नवरात्रि के बाद मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत से जुड़ा है। कई स्थानों पर मां दुर्गा की विजय के रूप में भी इसका विशेष महत्व है।

विजयादशमी 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

Shardiya Navratri 2026 के बाद विजयादशमी पर कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं निभाई जाती हैं:

  1. मां दुर्गा की पूजा और आरती।

  2. पूजा में स्थापित कलश या जौ को परिवार की परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक हटाना।

  3. शस्त्र पूजा और वाहन पूजा, जहां यह परंपरा प्रचलित है।

  4. रावण दहन और रामलीला के आयोजन में भाग लेना।

  5. परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लेना और शुभ कार्यों की शुरुआत करना।

Shardiya Navratri 2026 नवरात्रि में स्थापित कलश, जौ और पूजा सामग्री का विसर्जन या निस्तारण स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार करना चाहिए। यदि आपके घर में विशेष विधि प्रचलित है, तो उसी का पालन करें।

शारदीय नवरात्रि 2026 से जुड़े 10 महत्वपूर्ण FAQs

Q1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू है?

Ans. शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होगी। इसी दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।

Q2. Navratri end date 2026 क्या है?

Ans. शारदीय नवरात्रि का समापन विजयादशमी के साथ मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को होगा। क्षेत्रीय परंपराओं में पूजा के अंतिम दिन की गणना अलग हो सकती है।

Q3. शारदीय नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त क्या है?

Ans. दिल्ली के पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक घटस्थापना का प्रमुख मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक है। अपने शहर के अनुसार समय की पुष्टि करें।

Q4. क्या 2026 में नवरात्रि नौ दिन की है?

Ans. नवरात्रि का धार्मिक उत्सव नौ देवियों की पूजा पर आधारित है, लेकिन 2026 में सप्तमी तिथि दो सूर्योदय तक रहने के कारण कैलेंडर में पूजा की तारीखें 11 से 19 अक्टूबर तक और विजयादशमी 20 अक्टूबर को पड़ रही हैं। इसलिए पर्व का कैलेंडर सामान्य नौ-दिवसीय क्रम से थोड़ा अलग दिखाई देता है।

Q5. दुर्गा अष्टमी 2026 किस दिन है?

Ans. उत्तर भारत में प्रचलित पंचांग के अनुसार दुर्गा अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को है। इस दिन मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन किया जा सकता है।

Q6. महानवमी 2026 कब है?

Ans. दिल्ली के पंचांग के अनुसार महानवमी की पूजा सोमवार, 19 अक्टूबर को की जा सकती है। नवमी तिथि मंगलवार, 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहेगी। स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा की तारीख बदल सकती है।

Q7. नवरात्रि 2026 में कन्या पूजन कब करना चाहिए?

Ans. कन्या पूजन अष्टमी या नवमी पर किया जाता है। 2026 में उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में 19 अक्टूबर को कन्या पूजन किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्णय लें।

Q8. क्या नवरात्रि में बिना कलश स्थापना के पूजा कर सकते हैं?

Ans. हां, भक्त अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर, फूल अर्पित करके और मंत्र जाप करके पूजा कर सकते हैं। कलश स्थापना एक प्रचलित परंपरा है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए समान विधि अनिवार्य नहीं होती।

Q9. नवरात्रि व्रत का पारण 2026 में कब करना चाहिए?

Ans. व्रत पारण अष्टमी या नवमी की पूजा और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जाता है। 2026 में तिथियों की विशेष स्थिति के कारण पारण का समय स्थानीय पंचांग से जांचना चाहिए।

Q10. क्या नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना जरूरी है?

Ans. दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्रि की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, लेकिन हर भक्त के लिए इसका संपूर्ण पाठ करना अनिवार्य नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार दुर्गा चालीसा, मंत्र जाप, आरती या अन्य प्रचलित पूजा कर सकते हैं।

 Disclaimer

यह लेख धार्मिक और सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। नवरात्रि की तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, अष्टमी-नवमी पूजा, हवन और व्रत पारण का समय स्थानीय पंचांग तथा धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या योग्य पुरोहित से समय की पुष्टि करें।

Website पर प्रकाशित जानकारी का उद्देश्य श्रद्धालुओं को त्योहारों, पूजा-विधियों और धार्मिक परंपराओं के बारे में उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।

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