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Karva Chauth 2026: करवा चौथ कब है? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त, चंद्र दर्शन समय और व्रत कथा

करवा चौथ हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से श्रद्धापूर्वक मनाती हैं। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करके व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा चंद्र देव की पूजा करती हैं।

Karva Chauth 2026 में यह पावन पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं शाम को करवा चौथ की पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रमा निकलने का समय और व्रत की शुरुआत हर शहर में अलग-अलग हो सकती है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए अपने शहर के अनुसार सही समय जानना जरूरी है।

इस लेख में जानिए Karva Chauth 2026 date and time, करवा चौथ पूजा विधि, सरगी का महत्व, व्रत के नियम, करवा चौथ की कथा, चंद्र दर्शन का समय और भारत के प्रमुख 10 शहरों में पूजा का शुभ मुहूर्त।

Note - इस ब्लॉग में दी गई जानकारी गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के संस्थापक, पुराण मनीषी पूज्य श्री कौशिक जी महाराज जी के अनुसार प्रस्तुत की गई है। अलग-अलग परंपराओं, पंचांगों और स्थान के अनुसार विधि एवं मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

करवा चौथ 2026 कब है? (Karva Chauth 2026 Date)

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं।

वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा।

करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करती हैं। इसके बाद दिनभर पूजा और धार्मिक परंपराओं का पालन करती हैं। शाम को भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है और उसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।

Karva Chauth 2026 Date and Time

विवरण तारीख और समय
करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
पर्व करवा चौथ
पक्ष कृष्ण पक्ष
तिथि चतुर्थी
चतुर्थी तिथि प्रारंभ 29 अक्टूबर, लगभग रात 1:07–1:08 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त 29 अक्टूबर, लगभग रात 10:10–10:11 बजे
पूजा का सामान्य समय शाम के समय, स्थानीय मुहूर्त के अनुसार
व्रत का पारण चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद


ध्यान दें: तिथि और समय पंचांग के अनुसार दिए गए हैं। स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। पूजा के लिए अपने शहर का समय जरूर देखें।

Karwa Chauth 2026 Puja Muhurat क्या है?

करवा चौथ के दिन शाम को पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करती हैं।

पूजा के दौरान महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।

Karwa Chauth 2026 में दिल्ली के संदर्भ में पूजा का शुभ समय लगभग शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया है। हालांकि, यह समय सभी शहरों के लिए समान नहीं है।

शहर के अनुसार सूर्यास्त, चतुर्थी तिथि और स्थानीय पंचांग में अंतर होने के कारण पूजा का मुहूर्त भी बदल सकता है।

इसलिए पूजा शुरू करने से पहले अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

करवा चौथ 2026 चतुर्थी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?

करवा चौथ की पूजा और व्रत चतुर्थी तिथि के आधार पर निर्धारित होते हैं।

2026 में चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात लगभग 1:07–1:08 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात लगभग 10:10–10:11 बजे समाप्त होगी।

चतुर्थी तिथि के दौरान ही करवा चौथ की पूजा की जाती है।

इस दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करके व्रत शुरू करती हैं और शाम को पूजा करती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक रखा जाता है। हालांकि, व्रत की विधि और नियम परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।

Karva Chauth 2026 Moon Time: करवा चौथ पर चांद कब निकलेगा?

करवा चौथ के दिन चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है। महिलाएं पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात में चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती हैं।

चंद्रमा दिखाई देने पर महिलाएं चंद्र देव की पूजा करती हैं और जल से अर्घ्य देती हैं।

इसके बाद अपने पति के साथ व्रत का पारण करती हैं।

Karwa Chauth 2026 moon time हर शहर में अलग होगा। उदाहरण के लिए, दिल्ली में चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:17 बजे और मुंबई में लगभग रात 9:00 बजे बताया गया है।

चंद्रमा के वास्तविक दर्शन में मौसम, बादल, आसपास की इमारतों और क्षितिज की स्थिति के कारण कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

इसलिए केवल अनुमानित समय देखकर व्रत खोलने के बजाय चंद्रमा के वास्तविक दर्शन होने की प्रतीक्षा करें।

करवा चौथ 2026 पूजा मुहूर्त और चंद्र दर्शन: 10 प्रमुख शहरों का समय

करवा चौथ पर पूजा का शुभ समय और चंद्रमा निकलने का समय शहर के अनुसार अलग-अलग होता है।

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा मुहूर्त भी बदलता है।

नीचे 29 अक्टूबर 2026 के लिए 10 प्रमुख भारतीय शहरों के अनुमानित पूजा मुहूर्त और चंद्र दर्शन का समय दिया गया है।

Karva Chauth 2026 City Wise Puja Muhurat

शहर पूजा का शुभ मुहूर्त चंद्र दर्शन का समय
दिल्ली शाम 5:38 से 6:56 बजे रात 8:17 बजे
आगरा शाम 5:37 से 6:54 बजे रात 8:18 बजे
जयपुर शाम 5:46 से 7:03 बजे रात 8:28 बजे
लखनऊ शाम 5:26 से 6:43 बजे रात 8:06 बजे
मुंबई शाम 6:07 से 7:22 बजे रात 9:00 बजे
कोलकाता शाम 5:01 से 6:17 बजे रात 7:47 बजे
चंडीगढ़ शाम 5:38 से 6:55 बजे रात 8:12 बजे
भोपाल शाम 5:44 से 7:00 बजे रात 8:31 बजे
अहमदाबाद शाम 6:04 से 7:20 बजे रात 8:52 बजे
वाराणसी शाम 5:19 से 6:36 बजे रात 8:02 बजे


समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार है। ये प्रकाशित पंचांग-आधारित अनुमान हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

दिल्ली में Karva Chauth 2026 Puja Time

दिल्ली में करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा।

दिल्ली के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया है। चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:17 बजे होने का अनुमान है।

दिल्ली में व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को पूजा की तैयारी करके शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं।

चंद्रमा के दर्शन होने पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

आगरा में Karva Chauth 2026 Moon Time

आगरा में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा।

आगरा के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग शाम 5:37 बजे से 6:54 बजे तक बताया गया है। चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:18 बजे होने का अनुमान है।

आगरा में महिलाएं शाम को पूजा करके चंद्र दर्शन की प्रतीक्षा करेंगी।

चंद्रमा दिखाई देने पर चंद्र देव को जल अर्पित करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

जयपुर में Karwa Chauth 2026 Puja Muhurat

जयपुर में करवा चौथ का पूजा मुहूर्त लगभग शाम 5:46 बजे से 7:03 बजे तक बताया गया है।

यहां चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:28 बजे होने का अनुमान है।

जयपुर में व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के लिए शाम को तैयारियां कर सकती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोल सकती हैं।

लखनऊ में Karwa Chauth 2026 Moonrise Time

लखनऊ में करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।

लखनऊ के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग शाम 5:26 बजे से 6:43 बजे तक बताया गया है। चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:06 बजे होने का अनुमान है।

लखनऊ में महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और चंद्र दर्शन का समय देख सकती हैं।

मुंबई में Karwa Chauth 2026 Moon Time

मुंबई में करवा चौथ के दिन चंद्रमा का उदय उत्तर भारत के कई शहरों की तुलना में देर से होता है।

मुंबई के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग शाम 6:07 बजे से 7:22 बजे तक और चंद्र दर्शन का समय लगभग रात 9:00 बजे बताया गया है।

मुंबई में व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन होने तक व्रत रखना चाहिए।

कोलकाता में Karwa Chauth 2026 Moonrise Time

कोलकाता में करवा चौथ का पूजा मुहूर्त लगभग शाम 5:01 बजे से 6:17 बजे तक बताया गया है।

चंद्रमा का उदय लगभग रात 7:47 बजे होने का अनुमान है।

कोलकाता में चंद्र दर्शन का समय दिल्ली और मुंबई की तुलना में पहले हो सकता है।

चंडीगढ़ में Karwa Chauth 2026 Puja Time

चंडीगढ़ में करवा चौथ का पूजा मुहूर्त लगभग शाम 5:38 बजे से 6:55 बजे तक बताया गया है।

चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:12 बजे होने का अनुमान है।

व्रत रखने वाली महिलाएं स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करके चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण कर सकती हैं।

भोपाल में Karwa Chauth 2026 Moon Time

भोपाल में करवा चौथ का पूजा मुहूर्त लगभग शाम 5:44 बजे से 7:00 बजे तक बताया गया है।

चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:31 बजे होने का अनुमान है।

भोपाल में चंद्र दर्शन का समय स्थानीय मौसम और क्षितिज की स्थिति के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

अहमदाबाद में Karwa Chauth 2026 Puja Muhurat

अहमदाबाद में करवा चौथ का पूजा मुहूर्त लगभग शाम 6:04 बजे से 7:20 बजे तक बताया गया है।

चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:52 बजे होने का अनुमान है।

अहमदाबाद में व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को पूजा करके चंद्रमा के दर्शन की प्रतीक्षा कर सकती हैं।

वाराणसी में Karwa Chauth 2026 Moonrise Time

वाराणसी में करवा चौथ का पूजा मुहूर्त लगभग शाम 5:19 बजे से 6:36 बजे तक बताया गया है।

चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:02 बजे होने का अनुमान है।

वाराणसी में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना कर सकती हैं।

करवा चौथ का धार्मिक महत्व क्या है?

करवा चौथ का पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से व्रत रखती हैं।

करवा चौथ की पूजा में माता पार्वती की विशेष आराधना की जाती है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, शांति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।

करवा चौथ केवल उपवास रखने का पर्व नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को मजबूत करने का अवसर भी है।

करवा चौथ की सरगी क्या होती है?

करवा चौथ के दिन सरगी ग्रहण करने की परंपरा है।

सरगी वह भोजन है जिसे महिलाएं सूर्योदय से पहले ग्रहण करती हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।

परंपरा के अनुसार, सरगी सास अपनी बहू को देती हैं। हालांकि, परिवार की परंपरा और परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।

सरगी में फल, मिठाई, सूखे मेवे, दूध और हल्का भोजन शामिल किया जाता है।

सरगी का उद्देश्य दिनभर व्रत रखने से पहले शरीर को ऊर्जा देना भी है।

करवा चौथ 2026 में सरगी कब खाएं?

करवा चौथ के दिन सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है।

सरगी का समय स्थानीय सूर्योदय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

सरगी ग्रहण करने के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं।

यदि आप करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, तो अपने शहर के सूर्योदय का समय देखकर सरगी ग्रहण करें।

करवा चौथ की सरगी में क्या खाना चाहिए?

सरगी में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना अच्छा माना जाता है जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करें।

सरगी में सामान्य रूप से निम्न चीजें शामिल की जा सकती हैं:

  1. फल

  2. दूध या दही

  3. सूखे मेवे

  4. हल्का भोजन

  5. मिठाई

  6. पानी

सरगी में बहुत अधिक तला हुआ या भारी भोजन करने से बचना बेहतर हो सकता है।

स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर अपने खानपान का निर्णय डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें।

करवा चौथ व्रत कैसे रखें?

करवा चौथ का व्रत श्रद्धा और संकल्प के साथ रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करती हैं और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करके व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद दिनभर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत रखती हैं। शाम को पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा माता की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनें और अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर चंद्र देव को जल से अर्घ्य दें और अपने पति के दर्शन करके व्रत का पारण करें। व्रत के नियम परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए श्रद्धा के साथ अपनी शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।

करवा चौथ व्रत रखने की विधि
  1. करवा चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

  2. अपनी परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करें।

  3. व्रत रखने का संकल्प लें।

  4. दिनभर श्रद्धा और संयम बनाए रखें।

  5. शाम को पूजा स्थल की तैयारी करें।

  6. भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।

  7. करवा चौथ की व्रत कथा सुनें।

  8. चंद्रमा के दर्शन होने पर चंद्र देव को अर्घ्य दें।

  9. अपने पति के साथ व्रत का पारण करें।

Note - व्रत के नियम परिवार की परंपरा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकते हैं।

करवा चौथ 2026 पूजा विधि

करवा चौथ के दिन शाम को विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है।

पूजा में भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता का स्मरण किया जाता है।

पूजा स्थल की तैयारी करें

शाम को पूजा करने से पहले घर के पूजा स्थल को साफ करें।

पूजा के लिए चौकी तैयार करें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

करवा चौथ पूजा सामग्री

करवा चौथ की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री पहले से तैयार कर लें।

पूजा सामग्री में सामान्यतः निम्न चीजें शामिल होती हैं:

  1. पूजा की थाली

  2. करवा या मिट्टी का पात्र

  3. जल

  4. दीपक

  5. रोली

  6. अक्षत

  7. फूल

  8. धूप

  9. मिठाई

  10. फल

  11. चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए पात्र

पूजा सामग्री परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा करें

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करें।

इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।

माता पार्वती से अखंड सौभाग्य, परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें।

करवा चौथ की व्रत कथा सुनें

पूजा के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनना या पढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है।

व्रत कथा सुनते समय श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखें।

चंद्रमा को अर्घ्य दें

रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर पूजा की थाली लेकर चंद्र देव की पूजा करें।

चंद्रमा को जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

इसके बाद अपने पति के साथ व्रत का पारण करें।
 


करवा चौथ व्रत कथा हिंदी में (Karva Chauth Vrat Katha)

करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं तथा करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं। इस पर्व पर वीरवती की कथा सुनने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और मंगल की कामना की जाती है।

वीरवती की करवा चौथ व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में वीरवती नाम की सुंदर और धर्मपरायण राजकुमारी रहती थी। वह सात भाइयों की इकलौती बहन थी। सभी भाई अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे और उसकी हर इच्छा पूरी करने का प्रयास करते थे।

समय आने पर वीरवती का विवाह एक योग्य राजकुमार से हुआ। विवाह के बाद जब पहला करवा चौथ आया, तो वीरवती ने अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखने का संकल्प लिया।

करवा चौथ के दिन वीरवती सुबह जल्दी उठी। उसने स्नान करके सरगी ग्रहण की और पूरे श्रद्धाभाव से व्रत शुरू किया। दिनभर उसने न तो भोजन किया और न ही पानी पिया। वह भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का स्मरण करती रही।

दिन बीतने के साथ वीरवती को भूख और प्यास लगने लगी। निर्जला व्रत रखने के कारण वह बहुत कमजोर हो गई। शाम होते-होते उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह अपने भाइयों की चिंता का कारण बन गई।

वीरवती के सातों भाई अपनी बहन को इस अवस्था में देखकर बहुत दुखी हुए। वे चाहते थे कि उनकी बहन जल्द से जल्द भोजन कर ले, लेकिन वीरवती चंद्रमा के दर्शन किए बिना व्रत खोलने के लिए तैयार नहीं थी।

भाइयों ने बनाया चंद्रमा निकलने का झूठा दृश्य

वीरवती की परेशानी देखकर उसके भाइयों ने एक उपाय सोचा। वे अपनी बहन को भोजन कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने दूर एक पेड़ पर दीपक जलाया और छलनी की सहायता से ऐसा दृश्य बनाया, मानो आकाश में चंद्रमा निकल आया हो।

उन्होंने वीरवती से कहा कि चंद्रमा निकल आया है और अब वह पूजा करके अपना व्रत खोल सकती है।

वीरवती अपने भाइयों की बात पर विश्वास कर गई। उसने उस प्रकाश को चंद्रमा समझकर पूजा की और अर्घ्य अर्पित कर दिया। इसके बाद उसने भोजन ग्रहण कर लिया।

लेकिन धार्मिक कथा के अनुसार, व्रत पूरा होने से पहले ही खोलने के कारण उसके पति के जीवन में संकट आ गया।

वीरवती के पति पर आया संकट

जब वीरवती अपने पति के पास पहुंची, तो उसने देखा कि उसके पति की स्थिति ठीक नहीं है। कथा के विभिन्न प्रचलित रूपों में बताया जाता है कि उसके पति पर संकट आया और वह गंभीर अवस्था में पहुंच गए।

वीरवती अपने पति की हालत देखकर बहुत दुखी हुई। उसे समझ में आ गया कि उसने चंद्रमा के वास्तविक दर्शन किए बिना व्रत खोल दिया था।

वह भगवान से अपने पति के जीवन की रक्षा करने की प्रार्थना करने लगी।

वीरवती ने मन में संकल्प लिया कि वह श्रद्धा और विश्वास के साथ करवा चौथ का व्रत रखेगी और भगवान की पूजा करेगी।

वीरवती ने श्रद्धा से रखा करवा चौथ का व्रत

वीरवती ने पूरे विश्वास के साथ भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की आराधना की।

उसने अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए प्रार्थना की। वह अपनी भूल के लिए क्षमा मांगती रही और भगवान से अपने पति को स्वस्थ करने की विनती करती रही।

उसकी भक्ति, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प को देखकर देवी-देवता प्रसन्न हुए।

कथा के अनुसार, माता पार्वती की कृपा से वीरवती के पति को जीवनदान मिला और उसके वैवाहिक जीवन में फिर से सुख लौट आया।

इस प्रकार वीरवती ने श्रद्धा और विश्वास के साथ करवा चौथ का व्रत पूरा किया।

करवा चौथ व्रत कथा से मिलने वाली शिक्षा

वीरवती की कथा हमें श्रद्धा, विश्वास, धैर्य और धार्मिक परंपराओं के महत्व का संदेश देती है।

करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

इस कथा के माध्यम से यह समझाया जाता है कि पूजा और व्रत में मन की पवित्रता, श्रद्धा और संकल्प का विशेष महत्व होता है।

करवा चौथ की पूजा करते समय महिलाएं वीरवती की कथा सुनकर भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्र देव से अपने परिवार में सुख, शांति, प्रेम और मंगल बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं।

नोट: वीरवती की कथा के अलग-अलग पारंपरिक रूप प्रचलित हैं। ऊपर दिया गया पाठ एक प्रचलित लोककथा का सरल हिंदी रूपांतरण है।

करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा होती है?

करवा चौथ के दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, करवा माता और चंद्र देव की पूजा की जाती है।

भगवान गणेश

भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है।

करवा चौथ की पूजा में उनका स्मरण करके व्रत को शुभ रूप से संपन्न करने की प्रार्थना की जाती है।

भगवान शिव

भगवान शिव की पूजा सुख, शांति और परिवार की मंगलकामना के लिए की जाती है।

माता पार्वती

माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

महिलाएं उनसे अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।

चंद्र देव

करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है।

चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

करवा चौथ पर क्या करना चाहिए?

करवा चौथ के दिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा और व्रत करना शुभ माना जाता है।

इस दिन निम्न बातों का ध्यान रखें:

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

  2. अपनी परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करें।

  3. दिनभर श्रद्धा और संयम बनाए रखें।

  4. शाम को भगवान गणेश, शिव और माता पार्वती की पूजा करें।

  5. करवा चौथ की कथा सुनें।

  6. चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दें।

  7. परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखें।

करवा चौथ पर क्या नहीं करना चाहिए?

करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए।

सामान्य रूप से निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है:

  1. पूजा के समय जल्दबाजी न करें।

  2. व्रत के दौरान क्रोध और विवाद से बचें।

  3. पूजा सामग्री को व्यवस्थित रखें।

  4. चंद्रमा के दर्शन से पहले व्रत खोलने की जल्दबाजी न करें।

  5. अपनी शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज न करें।

धार्मिक व्रत श्रद्धा और आस्था का विषय है।

स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास रखने के बजाय डॉक्टर की सलाह और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लें।

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है।

चंद्रमा के उदय होने पर महिलाएं पूजा की थाली लेकर चंद्र देव के दर्शन करती हैं।

इसके बाद जल से अर्घ्य अर्पित करके चंद्र देव से सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।

कुछ परिवारों में छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा भी होती है।

चंद्र दर्शन और पूजा की विधि परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

करवा चौथ व्रत का पारण कैसे करें?

करवा चौथ का व्रत चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद पारण करने की परंपरा है। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर चंद्र देव को जल से अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद अपने पति के दर्शन करके व्रत का पारण करती हैं। पारण के समय अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भोजन ग्रहण किया जा सकता है।

करवा चौथ व्रत पारण की विधि
  1. चंद्र दर्शन करें: चंद्रमा के उदय होने पर उनके दर्शन करें।

  2. अर्घ्य अर्पित करें: जल से चंद्र देव को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

  3. पति के दर्शन करें: पारंपरिक विधि के अनुसार छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखें।

  4. व्रत खोलें: अपने पति के साथ व्रत का पारण करें।

  5. भोजन ग्रहण करें: पहले पानी पिएं और फिर अपनी परंपरा के अनुसार हल्का भोजन करें।

व्रत का पारण अपनी धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार करें। दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को पारण के समय धीरे-धीरे पानी पीना और हल्का भोजन करना चाहिए।

क्या कुंवारी लड़कियां करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

करवा चौथ का व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाता है।

हालांकि, कुछ परिवारों और क्षेत्रों में अविवाहित लड़कियां भी अपनी धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत इच्छाओं के अनुसार यह व्रत रखती हैं।

अविवाहित लड़कियां अपने भावी जीवन, अच्छे जीवनसाथी और वैवाहिक सुख की कामना से पूजा कर सकती हैं।

व्रत रखने से पहले परिवार की परंपरा और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।

करवा चौथ व्रत में पानी पी सकते हैं क्या?

करवा चौथ पर कुछ महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें पूरे दिन पानी नहीं पिया जाता।

कुछ महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा या स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार अथवा पानी ग्रहण करके व्रत रखती हैं।

व्रत का तरीका परिवार की धार्मिक परंपरा और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

यदि किसी महिला को कमजोरी, चक्कर, मधुमेह, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो कठोर निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

धार्मिक श्रद्धा के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।

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करवा चौथ 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. Karva Chauth 2026 कब है?

Ans. Karva Chauth 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।

Q2. Karwa Chauth 2026 date and time क्या है?

Ans. करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को है। चतुर्थी तिथि लगभग रात 1:07–1:08 बजे शुरू होकर रात 10:10–10:11 बजे समाप्त होगी। स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

Q3. करवा चौथ 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

Ans. दिल्ली के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया है। अन्य शहरों में पूजा का समय अलग हो सकता है।

Q4. Karwa Chauth 2026 moon time क्या है?

Ans. दिल्ली में चंद्रमा का उदय लगभग रात 8:17 बजे होने का अनुमान है। चंद्र दर्शन का समय शहर के अनुसार बदलता है।

Q5. करवा चौथ पर सरगी कब खानी चाहिए?

Ans. करवा चौथ के दिन सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है। इसका समय स्थानीय सूर्योदय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार होता है।

Q6. करवा चौथ का व्रत किसके लिए रखा जाता है?

Ans. करवा चौथ का व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख की कामना से रखती हैं।

Q7. करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

Ans. करवा चौथ पर भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, करवा माता और चंद्र देव की पूजा की जाती है।

Q8. करवा चौथ का व्रत कब खोला जाता है?

Ans. करवा चौथ का व्रत सामान्यतः रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद खोला जाता है।

Q9. करवा चौथ पर चंद्रमा को क्या चढ़ाया जाता है?

Ans. करवा चौथ पर चंद्र देव को जल से अर्घ्य दिया जाता है। पूजा की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

Q10. क्या कुंवारी लड़कियां करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

Ans. कुछ परिवारों और धार्मिक परंपराओं में अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत रखती हैं। व्रत रखने का निर्णय अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार करना चाहिए।

Q11. करवा चौथ पर कौन सी कथा सुननी चाहिए?

Ans. करवा चौथ पर वीरवती की कथा सहित इस पर्व से जुड़ी पारंपरिक व्रत कथाएं सुनने की परंपरा है।

Q12. करवा चौथ का धार्मिक महत्व क्या है?

Ans. करवा चौथ पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं परिवार की खुशहाली और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

Q13. करवा चौथ पर चंद्रमा कितने बजे निकलेगा?

Ans. चंद्रमा का उदय हर शहर में अलग-अलग समय पर होगा। दिल्ली में लगभग रात 8:17 बजे, आगरा में रात 8:18 बजे और मुंबई में रात 9:00 बजे चंद्र दर्शन का अनुमान है।

Q14. करवा चौथ पर व्रत का पारण कैसे करें?

Ans. चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।

Q15. करवा चौथ पर क्या खाना चाहिए?

Ans. व्रत से पहले सरगी में फल, दूध, सूखे मेवे और हल्का भोजन ग्रहण किया जा सकता है। व्रत के पारण के समय हल्का भोजन करना बेहतर होता है।

Karva Chauth 2026 पर श्रद्धा और प्रेम के साथ करें पूजा

Karva Chauth 2026 का पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दिन पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से व्रत रखती हैं। भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्र देव की पूजा करके परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

करवा चौथ की पूजा में सरगी ग्रहण करने से लेकर चंद्र दर्शन और व्रत पारण तक प्रत्येक परंपरा का अपना धार्मिक महत्व है।

सभी श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन का समय देखकर व्रत संपन्न करें।

आचार्य कौशिक जी महाराज की ओर से सभी श्रद्धालुओं को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान शिव और माता पार्वती सभी के जीवन में सुख, शांति, प्रेम और मंगल प्रदान करें।

Disclaimer 

इस लेख में दी गई करवा चौथ 2026 की तारीख, पूजा मुहूर्त, चतुर्थी तिथि और चंद्र दर्शन के समय की जानकारी धार्मिक पंचांग और उपलब्ध गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग पंचांग, स्थान और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पूजा से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग या योग्य पंडित से समय की पुष्टि करनी चाहिए।

व्रत और पूजा की विधि परिवार की धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास रखने से पहले चिकित्सक की सलाह लें।

यह लेख धार्मिक और सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है।

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