परम पूज्य पुराण मनीषी श्री कौशिक जी महाराज जी का जन्म 26 मार्च 1974 को आगरा के तासौङ गांव में एक सनाड्य ब्राह्मण परिवार में हुआ। जो राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा को स्पर्श करता है। आपकी अधिकांश शिक्षा राजस्थान राज्य से हुई है। आपको बचपन से ही संतों के साथ में बैठने की रुचि थी। पूज्य महाराज श्री जी के गांव में एक आध्यात्मिक आश्रम है, जिसे हनुमान जी महाराज का सिद्ध स्थान हनुमान गुफा के नाम से जाना जाता है।आश्रम के संचालक पूज्य नागा बाबा श्री पूरन दास जी महाराज। जिनकी आपके ऊपर बड़ी कृपा रही है।पूज्य पूरन दास जी महाराज को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए है।ऐसे सिद्ध संत ने एक साधारण बालक को कौशिक महाराज बना दिया। बहुत ही कम उम्र में आप स्कूल भ्रमण पर वृन्दावन आये। पूज्य श्री डोंगरे जी महाराज के शिष्य पूज्य कमलेश जी महाराज से कथा सुनने के बाद हृदय में पूर्ण परिवर्तन हुआ,उस समय अपकी उम्र सिर्फ 14 वर्ष की थी। आपका विद्यार्थिकाल परम पूज्य ईश्वरपूरी जी महाराज जगन्नाथ घाट आश्रम (वृन्दावन) में निकला। आपने संस्कृत व्याकरण से आचार्य की उपाधि प्राप्त की। परम पूज्य जूना जुना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य गुरुदेव स्वामी श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज से अपने आध्यात्मिक गुरु दीक्षा प्राप्त की। आपके गुरुदेव की आप पर असीम कृपा है। आपने इस गुरु-शिष्य परंपरा को एक कदम आगे बढ़ाया है। आपके लाखों अनुयायी हैं, लाखों लोग आप पर विश्वास करते हैं, लाखों लोग आपके प्रवचन में बैठते हैं। आपके उपदेशों से भक्तों के हृदय में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है। आप देश के प्रथम ऐसे मूर्धन्य वक्ता हैं, जिन्होंने चारों वेदों, 18 पुराणों, 18 उपपुराणों, 18 औपपुराण , महाभारत, वाल्मिकी रामायण, श्रीमद्भगवत गीता तथा 33 रामायण की कथाओं के साथ-साथ चाणक्य नीति के साथ सम्पूर्ण नीतिया, स्मृति,उपनिषद,आध्यात्म एवं समाज से जुड़े अनेक देशभक्त और महापुरुष एवं नारी सम्मान के ऊपर प्रवचन किए हैंI समाज से जुड़कर आपने इस आध्यात्मिक जगत में एक मिसाल कायम की है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरदर्शन टीवी पर हर दिन लाखों लोग आपको सुनते हैं। आपका सार्वभौमिक एवं सरल सन्देश है कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में ज्ञान का दीपक एवं प्रेम का वातावरण स्थापित हो। आपने पूरे विश्व में अध्यात्म की यात्रा की है,तथा भारतीय सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया है।आपके संदेशों में धर्म की ध्वजा फहरायी गयी। आपके उपदेश से पता चलता है कि जिसकी नीति और नियति स्पष्ट है, वही मनुष्य जीवन जीने का अधिकारी है। आपने विशेष रूप से तीन बातें बताईं हैं कि समय, सम्पति और स्वास्थ्य हमेशा नहीं रहेंगे, इसलिए आज से ही इन्हें अच्छे कार्यों लगा दो। आपके सामाजिक योगदान को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने आपको कड़ी सुरक्षा मुहिम कराई है। आपके ऊपर अनेकौ बार असमाजिक तत्वों द्वारा हमला किया गया है इसलिए आपको हर राज्य में सरकार द्वारा कड़ी सुरक्षा मिलती है। पूज्य महाराज श्री जी के मार्गदर्शन में {विश्व जागरण मानव सेवा संघ चैरिटेबल ट्रस्ट}, {आचार्य कौशिक फाउंडेशन}, {पशु कल्याण मिशन} के साथ- साथ कई अन्य संगठन भी कार्य कर रहे हैं। आप परम गौभक्त हैं।आपका जन्म गौमाता की सेवा एवं समाज को एक नई दिशा दिखाने के लिए हुआ है।पूज्य महाराज श्री जी ने 100,000 गौवंश की सेवा का संकल्प लिया है,जिसके लिए अपने अन्न तक का त्याग कर दिया है आप गौमाता का दुग्ध लेकर इस कार्य को आगे बड़ा रहे है। वर्तमान समय में 24,000 से अधिक गौवंश हैं। आपके द्वारा [मध्य प्रदेश] की धरती माँ नर्मदा के किनारे (मंडला) में विशाल गौशाला का निर्माण किया है, जिसमें हजारों गौमाताओं की सेवा हो रही है।आपके यहां गौशाला से दूध, दही और घी का विक्रय नहीं होता I यह वहां रहने वाले लोगों एवं आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोग मे लिया जाता है। आपके द्वारा तुलसी गुरुकुल विद्यापीठ की स्थापना की गई है, जिसमें प्रतिवर्ष सैकड़ों बच्चे वेद व्याकरण एवं पांडित्य कर्म की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो पूर्णतः निःशुल्क है। तुलसी वन आश्रम प्रतिदिन 5000 से अधिक लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करता है। आश्रम में आवास एवं भोजन का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। आपके द्वारा वृद्ध माता-पिता के आश्रय हेतु 1000 कक्ष का तुलसी तपोवन मठ आश्रम का निर्माण किया गया है। हज़ारों बंदर जीव-जंतु बेसहारा मूक जीवों के लिए महाराज श्री जी के मार्गदर्शन में संस्था काम कर रही है।हाल ही में आपने 4800 किलोमीटर की माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा कराई है, जिसमें 1000 लोगों ने भाग लेकर ये पुण्य प्राप्त किया। आपने ये सिद्ध किया है कि हमारे सनातन धर्म में नदियों का कितना बड़ा महत्व हैं,इनकी स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखना हमारा मानवीय कर्तब्य है।महाराज श्री जी ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 16 वर्षो में कई हज़ारों वृक्ष लगवाए। श्री वृंदावन परिक्रमा मार्ग में 2011 से 2025 तक इतने वृक्ष लगाए गए कि पूरा मार्ग हरा-भरा नजर आता है।साधु-संतों के लिए रोटी, लंगोटी, कंबल, कमंडल,की सेवा चलती रहती है।असहाय बेटियों की शिक्षा एवं विवाह में अपकी संस्था कार्य कर रही है।आपके द्वारा कामधेनु गो चिकित्सालय का निर्माण किया गया है,आपके द्वारा तुलसी ब्रजभूमि जच्चा बच्चा सदन का निर्माण कराया गया है, जिसमें प्रसूतिका को सन्तान जन्म देने के लिए अद्भुत वातावरण की व्यवस्था की गई हैं।हाल ही में पूज्य महाराज श्री जी के द्वारा पंछियों के भोजन,आवास हेतु 68 फिट ऊँचे पंछी टावर का निर्माण कराया गया है।पूज्य महाराज श्री जी के द्वारा रामेश्वर धाम में समुद्र के किनारे राम रोटी अन्य क्षेत्र आश्रम का निर्माण होने के लिए जा रहा है बहुत जल्दी बन के तैयार हो रहा है। कोरोना कल मे पूज्य महाराज जी के द्वारा जरुरतमंद लोगो के लिए 14 ट्रक राशन एवं 1 ट्रक वस्त्र वृंदावन से चित्रकूट तक वितरण किया गया। संस्था ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 1999 से लेकर अभी तक बहुत काम किये हैं। ब्रज की भूमि पर एक विशाल तपोवन इंटरनेशनल कैंसर हॉस्पिटल बनने जा रहा है। आपने सेवा को ही सच्ची साधना माना है। आपकी गौ सेवा के लिए लेखक के पास शब्द नहीं हैं।ये संपूर्ण वातावरण मैंने सिर्फ सुना ही नहीं मैंने अपनी आंखों से देखा है।आश्रम के द्वार संचालित धन्वंतरी औषधालय गाँव-गाँव तक लगी हुई है।गौ तीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला[वृंदावन] वर्तमान में लगभग 142 एकड़ भूमी में है आने वाले समय में इसका और भी विस्तार होगा। बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ अभियान में महाराज श्री जी के द्वारा जल्दी ही कन्या महाविद्यालय बनने के लिए जा रहा है। आपके अद्भुत कार्यों की जानकारी देना सूर्य को दीपक दिखाने के बराबर है।ये रही पूज्य महाराज श्री जी के कर्म रूपी पुष्प की सुगंधि। मैं आपके चरणों में वंदन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं और भक्तों से निवेदन करता हूं कि आप भी किए जा रहे इन मानवीय कार्यों में शामिल होकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं और अपने घर की पहली रोटी गौ माता को दें।
हमारी संस्कृति और सनातन धर्म के उत्थान के लिए कम से कम 1 लाख गौमाता की रक्षा एवं सेवा करने का हमारा संकल्प है।
हमारा उद्देश्य अधिक से अधिक मानव सेवा करना है। हम जीव सेवा में विश्वास रखते हैं। चाहे वह मनुष्य हो या पशु, हम सभी की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं। हिंदू धर्म में सेवा को सर्वोच्च धर्म एवं धार्मिक कर्तव्यों में से एक माना गया है।
हमारे मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गौमाता की रक्षा एवं सेवा करना भी है। भारतीय संस्कृति में गाय को विश्व की माता माना गया है। गौमाता अपने दूध एवं अन्य उपयोगी उत्पादों के माध्यम से मानव समाज को अनेक प्रकार से लाभ प्रदान करती हैं और बदले में केवल घास एवं अन्न की अपेक्षा रखती हैं।
गौ रक्षा अर्थात राष्ट्र और विश्व की रक्षा। भारतीय धार्मिक परंपरा में गौमाता को अत्यंत पवित्र एवं पूजनीय माना गया है। गौमाता से जुड़ी अनेक धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं हमारे सनातन जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं। उनका दूध मानव जीवन के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठानों में घी का विशेष महत्व माना गया है।
वैदिक एवं धार्मिक ग्रंथों में गौ संरक्षण, गौ सेवा और गौ पालन के महत्व का वर्णन मिलता है। भारतीय संस्कृति में गौमाता के प्रति करुणा, सम्मान और संरक्षण की भावना को सदैव महत्वपूर्ण माना गया है। गौ हत्या को धार्मिक एवं नैतिक दृष्टि से गंभीर पाप माना गया है।
इसी भावना और संकल्प के साथ हमारा लक्ष्य है कि कम से कम 1 लाख गौमाता की रक्षा, सेवा और संरक्षण किया जाए तथा गौसेवा के माध्यम से हमारी संस्कृति, सनातन परंपराओं और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाया जाए।
हिंदू धर्म में जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ माने गए हैं—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। ये चारों मनुष्य को एक संतुलित, नैतिक और सार्थक जीवन जीने की दिशा प्रदान करते हैं।
भारत पूरे विश्व में अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं ने सदियों से मानव जीवन को सत्य, धर्म, सेवा, करुणा और सदाचार का मार्ग दिखाया है। यह पवित्र भूमि ऋषि-मुनियों, संतों और आध्यात्मिक महापुरुषों की तपोभूमि रही है। भारत की धरती पर जन्म लेना हमारे लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।
सनातन धर्म भारत की प्राचीन संस्कृति और जीवन-पद्धति का अभिन्न हिस्सा रहा है। हमारी संस्कृति ने सदैव सभी के कल्याण, प्रेम, सह-अस्तित्व और मानवता का संदेश दिया है। हालांकि आधुनिक समय में बदलती जीवनशैली और बाहरी सांस्कृतिक प्रभावों के कारण हमारी कई पारंपरिक मान्यताएं, संस्कार और परंपराएं धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं।
हमारा सपना एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना है, जहां सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराएं और मानवीय मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन हो तथा सभी समुदाय आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ साथ रह सकें।
सनातन धर्म में धर्म का अर्थ केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, सदाचार, कर्तव्य, नैतिकता और अच्छे आचरण पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
हिंदू जीवन-दर्शन में चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष बताए गए हैं। धर्म मनुष्य को सदाचार और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है, अर्थ जीवन की आवश्यकताओं को उचित तरीके से पूरा करने की प्रेरणा देता है, काम इच्छाओं और जीवन के सुखों को संतुलित रूप से स्वीकार करने का मार्ग बताता है तथा मोक्ष जीवन के अंतिम आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर ले जाता है।
इन जीवन मूल्यों के माध्यम से मनुष्य नैतिक, जिम्मेदार और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त करता है। हमारा प्रयास है कि सनातन धर्म की इन महान शिक्षाओं, संस्कारों और मूल्यों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ा जाए।
We exist for non-profits, social enterprises, community groups, activists, politicians and individual citizens that are making.
पुराण मनीषी पूज्य श्री कौशिक जी महाराज जी के सानिध्य एवं संचालन में तुलसीवन आश्रम श्रद्धालुओं की सेवा, सत्कार और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखने के लिए समर्पित एक पवित्र सेवा केंद्र है। वृंदावन धाम में आने वाले भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए आश्रम में उनके ठहरने, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की यथासंभव उचित व्यवस्था की जाती है।
श्रीधाम वृन्दावन की पावन भूमि पर स्थित गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि गौसेवा, करुणा, समर्पण और सनातन संस्कृति के संरक्षण का एक दिव्य सेवा-तीर्थ है। यहाँ हजारों गौवंशों की देखभाल, उनके भरण-पोषण, चिकित्सा और सुरक्षित आश्रय के लिए निरंतर सेवा कार्य किए जाते हैं। 17,000 से अधिक गौवंशों की सेवा का संकल्प इस गौशाला को गौसेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
गौवंश के लिए चारे की व्यवस्था गौ चारा सेवा गौ माता की सेवा और संरक्षण के लिए समर्पित एक पावन सेवा कार्य है। आचार्य कौशिक महाराज जी के मार्गदर्शन एवं प्रबंधन में तुलसीवन आश्रम द्वारा गौवंश के लिए चारे की उचित व्यवस्था करने और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गौ माता को पर्याप्त एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना गौसेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जल ही जीवन है जल सेवा मानव जीवन, जीव-जंतुओं और प्रकृति के संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सेवा है। जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। भारतीय संस्कृति में जल को सदैव पवित्र और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में सम्मान दिया गया है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए तुलसीवन आश्रम, आचार्य कौशिक जी महाराज के मार्गदर्शन एवं प्रबंधन में, जल संरक्षण, जल की उपलब्धता और जरूरतमंदों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने की दिशा में सेवा कार्यों को प्रोत्साहित कर रहा है।
गौ माता की सेवा का पावन संकल्प गौ सवामणी सेवा गौ माता की सेवा, संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित एक पावन सेवा कार्य है। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गौ माता को विशेष सम्मान और श्रद्धा का स्थान प्राप्त है। गौसेवा को करुणा, सेवा, संरक्षण और धर्म से जोड़कर देखा जाता है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए तुलसीवन आश्रम, आचार्य कौशिक महाराज जी के मार्गदर्शन एवं प्रबंधन में, गौवंश की सेवा और उनके संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है।
गौ दान सेवा का पावन संकल्प गौ दान सेवा सनातन परंपरा में सेवा, करुणा और संरक्षण की भावना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सेवा कार्य है। गौ माता के प्रति श्रद्धा और सम्मान भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसी पावन भावना को आगे बढ़ाते हुए तुलसीवन आश्रम, आचार्य कौशिक जी महाराज के मार्गदर्शन एवं प्रबंधन में, गौवंश के संरक्षण और सेवा के लिए निरंतर प्रयासरत है।
गौ भूमि दान सेवा गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित भविष्य की दिशा में किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण सेवा कार्य है। भारतीय सनातन परंपरा में गौवंश को सदैव विशेष सम्मान और पूजनीय स्थान प्राप्त रहा है। गाय को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, कृषि और प्राकृतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। वर्तमान समय में बढ़ते शहरीकरण, घटते खुले स्थान और संसाधनों की कमी के कारण बेसहारा गौवंश के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना एक बड़ी आवश्यकता बन गई है। इसी उद्देश्य से गौ भूमि दान सेवा के माध्यम से गौवंश के लिए सुरक्षित भूमि उपलब्ध कराने और गौसेवा के कार्यों को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
अन्नक्षेत्र भंडारा सेवा भारतीय सनातन परंपरा में सेवा, करुणा और परोपकार का एक पवित्र स्वरूप है। भारतीय संस्कृति में अन्न को केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और ईश्वर का प्रसाद माना गया है। जरूरतमंद, साधु-संत, श्रद्धालु और यात्रियों को प्रेमपूर्वक भोजन कराना मानव सेवा का महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। इसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए अन्नक्षेत्र भंडारा सेवा के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुँचाने और उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
द्वादशी भंडारा सेवा सनातन धर्म की सेवा, श्रद्धा और परोपकार की भावना से जुड़ी एक पवित्र सेवा है। हिंदू धर्म में द्वादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। एकादशी व्रत के अगले दिन आने वाली द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना, व्रत का पारण, दान-पुण्य और सेवा कार्य करने की परंपरा रही है। इसी पावन अवसर पर जरूरतमंदों, साधु-संतों, श्रद्धालुओं और अन्य सेवाभावी लोगों के लिए भंडारे का आयोजन करना पुण्य एवं सेवा भावना का सुंदर माध्यम माना जाता है
वार्षिक भंडारा सेवा सेवा, श्रद्धा, परोपकार और मानव कल्याण की भावना से जुड़ा एक पवित्र प्रयास है। भारतीय सनातन परंपरा में अन्नदान को विशेष महत्व दिया गया है। किसी जरूरतमंद, साधु-संत, श्रद्धालु या भूखे व्यक्ति को प्रेमपूर्वक भोजन कराना मानव सेवा का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। इसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए वार्षिक भंडारा सेवा के माध्यम से वर्ष में विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं एवं जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, करुणा, सहयोग और परोपकार की भावना को मजबूत करना भी है।
कैंसर अस्पताल सेवा मानवता, करुणा और जरूरतमंद लोगों की सहायता की भावना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सेवा पहल है। कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसके उपचार के लिए लंबे समय तक चिकित्सा, विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक सुविधाओं और निरंतर देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। कई परिवारों के लिए कैंसर का इलाज आर्थिक और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे समय में जरूरतमंद मरीजों और उनके परिवारों को सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराना मानव सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए कैंसर अस्पताल सेवा के माध्यम से कैंसर से प्रभावित मरीजों और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। इस सेवा का उद्देश्य केवल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को कठिन समय में सहयोग, संवेदना और आशा प्रदान करना भी है।
यज्ञ अनुष्ठान सेवा भारतीय सनातन परंपरा, आध्यात्मिक साधना और लोककल्याण की भावना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सेवा है। भारतीय संस्कृति में यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समाज के कल्याण का माध्यम माना गया है। यज्ञ के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और सद्भाव की भावना को विकसित करने का प्रयास करता है।
हरित भारत भविष्य की हरियाली, आज का वृक्षारोपण पूज्य पुराण मनीषी आचार्य कौशिक जी महाराज के सानिध्य में एक पौधा लगाएं, एक जीवन बचाएं! वृक्ष लगाना है धर्म हमारा, हरित बनाना देश हमारा!
1 गौमाता 1 वर्ष सम्पूर्ण सेवा अभियान गौसेवा, जीवदया और सनातन सेवा भाव को समर्पित एक विशेष पहल है। इस अभियान के माध्यम से आप ₹25,000 के सहयोग से एक गौमाता की एक वर्ष की सेवा में सहभागी बन सकते हैं। गौशाला में गौमाताओं के लिए चारा, भोजन, स्वच्छ पानी, सुरक्षित आश्रय, साफ-सफाई और आवश्यक देखभाल जैसी व्यवस्थाओं के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता होती है। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला की इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक सेवाभावी लोगों को गौसेवा से जोड़ना और गौमाताओं की देखभाल में सहयोग बढ़ाना है। आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस सेवा अभियान से जुड़ सकते हैं। गौसेवा केवल दान नहीं, बल्कि करुणा, संवेदना और सेवा का संकल्प है। अपने परिवार और मित्रों को भी इस अभियान से जोड़ें और गौसेवा का संदेश आगे बढ़ाएं। ₹25,000 का सहयोग करें और 1 गौमाता 1 वर्ष सम्पूर्ण सेवा अभियान का हिस्सा बनें। 🐄🙏
खिचड़ी सेवा अभियान अन्नदान, मानव सेवा और परोपकार की भावना को समर्पित एक विशेष पहल है। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला द्वारा इस सेवा के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आप ₹3,650 के सहयोग से खिचड़ी सेवा में सहभागी बन सकते हैं। आपका योगदान भोजन सामग्री की व्यवस्था और सेवा कार्य को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है। यह केवल दान नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता और समाज में सेवा भावना को बढ़ाने का एक अवसर है। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें और अपने परिवार एवं मित्रों को भी इस पुण्य सेवा से जोड़ें। 🍲 खिचड़ी सेवा अपनाइए, अन्नदान की सेवा में सहभागी बनिए। 🙏
नित्य भण्डारा सेवा अभियान अन्नदान, मानव सेवा और परोपकार की भावना को समर्पित एक विशेष पहल है। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आप ₹51,000 के सहयोग से नित्य भण्डारा सेवा में सहभागी बन सकते हैं। आपका सहयोग भोजन सामग्री, भोजन तैयार करने और वितरण जैसी सेवा व्यवस्थाओं में उपयोगी हो सकता है। यह केवल दान नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्नदान एवं मानव सेवा में योगदान देने का अवसर है। अपने परिवार और मित्रों को भी इस सेवा अभियान से जोड़ें और सेवा की भावना को आगे बढ़ाएं। 🍲 एक निवाला सेवा का, अनेक आशीर्वाद जीवन का। 🙏
गौशाला निर्माण भूमि सेवा से जुड़कर गौसेवा के इस पुण्य कार्य में अपना योगदान दें। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के लिए भूमि एवं निर्माण कार्य में सहयोग हेतु केवल ₹5100 से सेवा अभियान का हिस्सा बनें। आपका छोटा सा सहयोग गौवंश के लिए सुरक्षित आश्रय, चारा, पानी और आवश्यक सुविधाओं के विकास में सहायक बन सकता है। आइए, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें तथा परिवार और परिचितों को भी इस सेवा अभियान से जोड़ें। गौसेवा, करुणा और सनातन सेवा के इस संकल्प में सहभागी बनें।
जीव-जंतु सेवा के माध्यम से मछली, कच्छप और चींटी जैसे जीवों के प्रति करुणा और सेवा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के इस सेवा अभियान से जुड़कर आप केवल ₹2500 वार्षिक सहयोग कर सकते हैं। आपका योगदान जीवों के लिए भोजन एवं सेवा कार्यों में सहायक बन सकता है। आइए, अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस पुण्य सेवा में सहभागी बनें और परिवार व समाज को भी जीवदया एवं करुणा का संदेश दें। जीव सेवा करें, करुणा बढ़ाएं और सनातन सेवा की भावना को आगे बढ़ाएं।
ब्रजभूमि वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि है। यहाँ मंदिरों, गलियों और परिक्रमा मार्गों पर बंदरों की बड़ी संख्या दिखाई देती है। ये जीव भी प्रकृति और हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गर्मी, सर्दी और भोजन की कमी जैसी परिस्थितियों में इन्हें सहायता की आवश्यकता हो सकती है। तुलसी तपोवन गौशाला के सेवा भाव से प्रेरित होकर आप भी बंदर सेवा के इस पुण्य कार्य में अपना योगदान दे सकते हैं। मात्र ₹1,200 का सहयोग देकर आप बंदरों के लिए भोजन और देखभाल से संबंधित सेवा कार्यों में सहभागी बनने का संकल्प ले सकते हैं। जीवों के प्रति दया, करुणा और संवेदना रखना हमारी मानवीय जिम्मेदारी है। आइए, अपनी सामर्थ्य के अनुसार आगे बढ़ें और जरूरतमंद जीवों की सेवा में योगदान दें।
गौ माता की सेवा भारतीय संस्कृति और हमारी धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। वृंदावन की पावन भूमि पर गौसेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। तुलसी तपोवन गौशाला में गौवंश की देखभाल के लिए नियमित रूप से चारे, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जरूरत होती है। आप ₹5,100 का सहयोग देकर हरे चारे की गाड़ी सेवा में सहभागी बन सकते हैं। आपका यह योगदान गौ माता के लिए हरे चारे की व्यवस्था करने में सहायक हो सकता है और गौसेवा के इस पावन कार्य को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
भारतीय संस्कृति में गुरुकुल परंपरा का विशेष महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही गुरुकुल केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने, अच्छे संस्कार सीखने और चरित्र निर्माण का केंद्र रहे हैं। गुरुकुल में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, विनम्रता, सेवा, सदाचार और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से परिचित कराया जाता है। इसी महान परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पुराण मनीषी पूज्य श्री कौशिक जी महाराज के द्वारा गुरुकुल का संचालन किया जाता है। इस सेवा कार्य का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कारों से जोड़ना तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहयोग करना है। आप भी एक विद्यार्थी की वार्षिक सेवा के लिए ₹6000 का सहयोग देकर इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं।
पूज्य पुराण मनीषी श्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में भगवान श्री गणेश जी की कृपा एवं पूज्य पुराण मनीषी श्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में श्री गणेश महिमा का भव्य धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं को भगवान श्री गणेश जी की भक्ति, आध्यात्मिक प्रवचन एवं दिव्य सत्संग का...
सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी माता की पूजा, सेवा और उनके महात्म्य का श्रवण करने से जीवन में आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। इसी धार्मिक परंपरा और तुलसी की महिमा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 25 अक्टूबर...
श्री बद्रीनारायण महात्म्य कथा का भव्य आयोजन 28 अक्टूबर 2026 को सूरत में सनातन धर्म की पावन परंपरा में भगवान श्रीहरि विष्णु की महिमा का श्रवण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 28 अक्टूबर 2026 को गुजरात के सूरत में श्री बद्रीनारायण महात्म्य कथा का भव्य आयोजन क...
श्रीमद्भागवत कथा 2026 – पुष्कर, राजस्थान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं के लिए वर्ष 2026 में एक विशेष आयोजन होने जा रहा है। पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन पुष्कर, राजस्थान में किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन 30 अक्ट...
गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026: तुलसीवन आश्रम वृंदावन में 16 से 24 नवंबर तक होगा श्री हरिवंश पुराण आयोजन गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026 के अवसर पर वृंदावन में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन 16 नवंबर से 24 नवंबर 2026 तक तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन में आयोजित किया जाएगा। कार्यक...
वृंदावन में एकादशी व्रत उद्यापन का विशेष आयोजन, श्री कौशिक जी महाराज का रहेगा सान्निध्य श्रीधाम वृंदावन में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों का अपना विशेष महत्व है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने के लिए पहुंचते हैं। इसी क्रम में वृंदावन स...
श्री राम कथा 2026 – चित्रकूट भगवान श्रीराम की कथा भारतीय सनातन परंपरा और धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी धार्मिक परंपरा से जुड़े एक विशेष आयोजन के रूप में पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में श्री राम कथा का आयोजन चित्रकूट में किया जाएगा। श्री राम कथा का आयोजन 20 द...
पाँचवां गौ महोत्सव 2027: अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन सनातन धर्म की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए वर्ष 2027 में एक विशेष आयोजन होने जा रहा है। पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में पाँचवां गौ महोत्सव, अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री श...
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