भादो मास की अजा एकादशी व्रत कथा: आज Aja Ekadashi 2026 पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, समस्त पाप होंगे नष्ट
सनातन धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना और आत्मसंयम का विशेष दिन माना गया है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को
अजा एकादशी Aja Ekadashi 2026 कहा जाता है। इसे कई स्थानों पर
अन्नदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने तथा भगवान विष्णु का स्मरण करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
अजा एकादशी 2026 का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत कथा का श्रवण और रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। अजा एकादशी की सबसे प्रसिद्ध कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है। कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ न छोड़ने वाले राजा हरिश्चंद्र को जब जीवन में असहनीय कष्टों का सामना करना पड़ा, तब महर्षि गौतम ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
आइए जानते हैं
भादो मास की अजा एकादशी व्रत कथा, इसकी सही तिथि, पूजा विधि, व्रत के नियम, पारण का समय और इस पावन व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
1. अजा एकादशी 2026 कब है? जानें व्रत की सही तिथि और शुभ समय
साल 2026 में
अजा एकादशी 7 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। मथुरा के पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम लगभग
7:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर की शाम लगभग
5:03–5:04 बजे समाप्त होगी। चूंकि 7 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान है, इसलिए इस दिन अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
अजा एकादशी 2026 महत्वपूर्ण समय
- अजा एकादशी व्रत: 7 सितंबर 2026, सोमवार
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 सितंबर 2026, शाम लगभग 7:29 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर 2026, शाम लगभग 5:03–5:04 बजे
- पारण: 8 सितंबर 2026, मंगलवार
- पारण समय: लगभग सुबह 6:01 बजे से 10:12 बजे तक, मथुरा के लिए
ध्यान रखें कि पंचांग के समय
स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए यदि आप मथुरा के अलावा किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना उचित रहेगा।
इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत का संकल्प लें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर भगवान विष्णु के नाम का जाप, पूजा, भजन और अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं।
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2. अजा एकादशी व्रत कथा सुनने और पढ़ने का क्या महत्व है?
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु को समर्पित बताया गया है।
अजा एकादशी व्रत कथा Aja Ekadashi 2026 का पाठ या श्रवण व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
मान्यता है कि व्रत रखने के साथ भगवान की कथा सुनने से व्यक्ति का मन भक्ति और सकारात्मक विचारों की ओर जाता है। अजा एकादशी की कथा विशेष रूप से राजा हरिश्चंद्र के सत्य, धैर्य और भगवान पर विश्वास की कहानी बताती है।
इस कथा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न आए, मनुष्य को सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार अजा एकादशी की कथा सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
3. राजा हरिश्चंद्र ने क्यों रखा था अजा एकादशी का व्रत?
राजा हरिश्चंद्र अपनी सत्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे। कथा के अनुसार परिस्थितियों के कारण उन्हें अपना राज्य, धन और परिवार तक छोड़ना पड़ा। इतना ही नहीं, उन्हें अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना पड़ा।
एक समय राजा हरिश्चंद्र अपने जीवन के दुखों से बहुत परेशान थे। वह इस चिंता में रहते थे कि इन कठिनाइयों से मुक्ति कैसे मिले। तभी उनकी भेंट महर्षि गौतम से हुई।
राजा ने महर्षि को अपनी पूरी व्यथा सुनाई। उनकी स्थिति देखकर महर्षि गौतम ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी
अजा एकादशी 2026 का व्रत Aja Ekadashi 2026 ka vrat करने की सलाह दी। महर्षि ने बताया कि श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत को करने तथा भगवान का स्मरण करने से उनके कष्ट दूर हो सकते हैं।
👉 नित्य भण्डारा सेवा अभियान से जुड़कर जरूरतमंदों तक भोजन और सेवा पहुँचाने के इस पावन कार्य में अपना योगदान दें।
4. भादो मास की अजा एकादशी Aja Ekadashi व्रत कथा: राजा हरिश्चंद्र की पूरी पावन कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय राजा हरिश्चंद्र नाम के एक महान और सत्यवादी राजा थे। वह अपनी प्रजा का पालन धर्मपूर्वक करते थे और सत्य को अपने जीवन का सबसे बड़ा आधार मानते थे।
लेकिन समय बदला और राजा के जीवन में ऐसी परिस्थितियां आईं कि उन्हें अपना राजपाट तक त्यागना पड़ा। कथा में बताया जाता है कि उन्होंने अपना राज्य एक ऋषि को दान कर दिया। इसके बाद परिस्थितियां इतनी कठिन हुईं कि उन्हें अपनी पत्नी और पुत्र तक को बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
स्वयं राजा हरिश्चंद्र को भी एक चांडाल के यहां सेवा करनी पड़ी। उन्हें श्मशान में आने वाले मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए कर लेने का कार्य सौंपा गया। यह काम उनके लिए अत्यंत कठिन था, लेकिन उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और अपने कर्तव्य का साथ नहीं छोड़ा।
समय बीतता गया। राजा हरिश्चंद्र अपने जीवन के कष्टों से अत्यंत दुखी हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इन कठिनाइयों से उन्हें मुक्ति कैसे मिलेगी।
इसी दौरान उनकी भेंट
महर्षि गौतम से हुई। राजा ने उन्हें प्रणाम किया और अपने जीवन में आए सभी दुखों की कहानी सुनाई। राजा की स्थिति देखकर महर्षि गौतम को बहुत दुख हुआ।

महर्षि गौतम ने राजा से कहा कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को
अजा एकादशी कहा जाता है। यदि राजा विधिपूर्वक इस व्रत को करें और भगवान विष्णु की आराधना करते हुए रात्रि जागरण करें, तो उन्हें अपने कष्टों से मुक्ति मिल सकती है।
राजा हरिश्चंद्र ने महर्षि की बात को स्वीकार किया।
जब अजा एकादशी आई तो राजा ने श्रद्धापूर्वक व्रत रखा। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की और पूरी श्रद्धा के साथ दिन बिताया। रात में भगवान का स्मरण करते हुए जागरण किया।
कथा के अनुसार अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा के जीवन की विपरीत परिस्थितियां समाप्त होने लगीं।
उनके जीवन में फिर से सुख और सम्मान लौट आया। उनका परिवार भी उन्हें वापस प्राप्त हुआ और उनका राज्य भी उन्हें पुनः मिल गया।
कथा में आगे बताया जाता है कि देवताओं ने राजा की सत्यनिष्ठा और धर्म के प्रति उनकी दृढ़ता को स्वीकार किया। उनके जीवन में आई विपत्ति समाप्त हुई और अंत में उन्हें दिव्य लोक की प्राप्ति हुई।
इस प्रकार
भादो मास की अजा एकादशी व्रत कथा हमें यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, धर्म, धैर्य और भगवान के प्रति विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए।
5. अजा एकादशी Aja Ekadashi व्रत कथा से कैसे बदली राजा हरिश्चंद्र की जिंदगी?
राजा हरिश्चंद्र की कथा केवल एक व्रत की कथा नहीं बल्कि सत्य और धैर्य की प्रेरणादायक कहानी भी है।
उनके जीवन में एक के बाद एक कठिनाइयां आईं। उन्होंने अपना राज्य खोया, परिवार से अलग हुए और कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा।
जब उन्होंने महर्षि गौतम के कहने पर अजा एकादशी का व्रत किया, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार उनके जीवन की परेशानियां समाप्त होने लगीं। उनका परिवार और राज्य उन्हें वापस प्राप्त हुआ।
इस कथा से यह सीख मिलती है कि मनुष्य को कठिन समय में निराश नहीं होना चाहिए। श्रद्धा, सत्य, संयम और धैर्य के साथ अपने कर्तव्य का पालन करते रहना चाहिए।
6. अजा एकादशी व्रत करने से क्या लाभ मिलता है? जानें धार्मिक महत्व
अजा एकादशी व्रत के लाभ धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं। इस व्रत को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और आत्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
मान्यता के अनुसार अजा एकादशी का व्रत करने से:
- मनुष्य को अपने पाप कर्मों से मुक्ति की भावना मिलती है।
- भगवान विष्णु की आराधना और भक्ति बढ़ती है।
- मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।
- संयम और आत्मनियंत्रण की भावना मजबूत होती है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना की जाती है।
- व्रत कथा सुनने और पढ़ने से धार्मिक पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है।
- भक्त भगवान विष्णु से मोक्ष और सद्गति की कामना करते हैं।
ध्यान रखें कि ये
धार्मिक मान्यताएं हैं। व्रत का उद्देश्य केवल फल प्राप्त करना नहीं बल्कि श्रद्धा, संयम, सेवा और आत्मचिंतन भी है।
7. अजा एकादशी पर कौन-कौन से नियम जरूर मानने चाहिए?
अजा एकादशी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
दिनभर भगवान विष्णु का नाम स्मरण करें। संभव हो तो
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
एकादशी के दिन चावल और सामान्य अनाज का सेवन न करने की परंपरा है। मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से भी दूर रहना चाहिए।
किसी व्यक्ति के प्रति क्रोध, झूठ, अपशब्द और विवाद से बचना भी व्रत की भावना के अनुरूप माना जाता है।
सामर्थ्य हो तो रात में भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें और अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
👉 खिचड़ी सेवा अभियान: अन्नदान के माध्यम से मानव कल्याण का संकल्प से जुड़कर सेवा और परोपकार के इस पावन अभियान में अपना योगदान दें।
8. अजा एकादशी Aja Ekadashi के दिन क्या खाएं और क्या नहीं खाएं?
एकादशी के व्रत में भोजन का नियम व्यक्ति की व्रत परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। सामान्य फलाहार व्रत में फल, दूध, दही, मखाने, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और सूखे मेवे आदि का सेवन किया जाता है।
अजा एकादशी में क्या खा सकते हैं?
- फल
- दूध
- दही
- मखाना
- साबूदाना
- सिंघाड़े का आटा
- कुट्टू का आटा
- सेंधा नमक
- सूखे मेवे
अजा एकादशी में क्या नहीं खाना चाहिए?
- चावल
- गेहूं और सामान्य अनाज
- दालें
- मांसाहारी भोजन
- शराब
- तामसिक भोजन
निर्जला व्रत करने वाले श्रद्धालु भोजन और पानी दोनों का त्याग करते हैं, लेकिन ऐसा व्रत अपनी शारीरिक क्षमता और परंपरा के अनुसार ही करना चाहिए। अस्वस्थ व्यक्ति, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत के कठोर नियम अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
9. अजा एकादशी Aja Ekadashi 2026 की पूजा कैसे करें? जानें सरल पूजा विधि और मंत्र

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा सरल तरीके से की जा सकती है।
अजा एकादशी पूजा विधि
- पहला चरण: सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
- दूसरा चरण: पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- तीसरा चरण: भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं।
- चौथा चरण: भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें।
- पांचवां चरण: भगवान विष्णु की पूजा करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- छठा चरण: भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें— “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।”
- सातवां चरण: अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- आठवां चरण: भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
एकादशी पर तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ी है। पूजा में सामग्री से अधिक श्रद्धा और भक्ति को महत्व दिया जाता है।
10. अजा एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें? जानें सही नियम
अजा एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। मथुरा के लिए 2026 में पारण का समय
8 सितंबर 2026 को सुबह लगभग 6:01 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है।
पारण के समय को लेकर अलग-अलग पंचांगों में कुछ अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।
पारण से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करें। इसके बाद जल ग्रहण करके व्रत समाप्त किया जा सकता है। अपनी परंपरा के अनुसार फल या सात्विक भोजन से भी पारण किया जा सकता है।
व्रत के बाद अचानक बहुत अधिक भोजन करने से बचें। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर माना जाता है।
11. विष्णु जी की आरती: अजा एकादशी पर जरूर पढ़ें यह पावन आरती
अजा एकादशी की पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती श्रद्धापूर्वक करें।
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे,
दुःख विनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का॥
माता-पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी॥
आरती के बाद भगवान विष्णु से अपने परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करें।
12. अजा एकादशी Aja Ekadashi 2026 पूजा सामग्री चेकलिस्ट: पूजा के लिए क्या-क्या चाहिए?
अजा एकादशी की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य रूप से आप ये सामग्री रख सकते हैं:
- भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा
- पीले फूल
- तुलसी दल
- दीपक
- घी या तेल
- धूप और अगरबत्ती
- अक्षत
- रोली या चंदन
- फल
- पंचामृत
- पीले वस्त्र, यदि परंपरा में हो
- प्रसाद
- जल का कलश
पूजा सामग्री में सबसे महत्वपूर्ण भगवान के प्रति श्रद्धा है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो तो उपलब्ध सामग्री से भी भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है।
अजा एकादशी 2026 FAQ
Q1. अजा एकादशी के दिन क्या करना चाहिए?
Ans. अजा एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, भजन और
भादो मास की अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार दान और जरूरतमंदों की सेवा भी की जा सकती है।
Q2. अजा एकादशी का दूसरा नाम क्या है?
Ans. अजा एकादशी को कई धार्मिक परंपराओं में
अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है। पंचांग परंपरा के अनुसार यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है।
Q3. एकादशी के व्रत में कौन सी चीज वर्जित है?
Ans. एकादशी व्रत में सामान्यतः चावल, गेहूं, दाल और अन्य अनाज का सेवन वर्जित माना जाता है। इसके अलावा मांसाहारी भोजन, शराब और तामसिक भोजन से भी बचना चाहिए। अलग-अलग वैष्णव और पारिवारिक परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं।
Q4. एकादशी का व्रत क्या खाकर खोलना चाहिए?
Ans. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी के दिन किया जाता है। शुरुआत में जल और हल्का सात्विक भोजन या फल लिया जा सकता है। अपनी परंपरा के अनुसार पारण करना चाहिए और बहुत भारी भोजन तुरंत नहीं लेना चाहिए।
Q5. एकादशी के दिन मंदिर में क्या चढ़ाना चाहिए?
Ans. भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, फल, चंदन, दीपक और प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। पूजा सामग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति मानी जाती है।
Q6. सबसे शक्तिशाली एकादशी कौन सी है?
Ans. किसी एक एकादशी को सभी लोगों के लिए निश्चित रूप से “सबसे शक्तिशाली” कहना उचित नहीं है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में
निर्जला एकादशी, मोक्षदा एकादशी, देवशयनी एकादशी आदि का विशेष महत्व बताया गया है। हर एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मसंयम का अवसर मानी जाती है।
Q7. क्या सुहागिन स्त्री को एकादशी व्रत करना चाहिए?
Ans. यदि किसी महिला की श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा में एकादशी व्रत रखा जाता है तो वह अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकती हैं। व्रत का स्वरूप निर्जला या फलाहार रखना आवश्यक नहीं है; स्वास्थ्य और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।
Q8. निर्जला एकादशी में प्यास लगे तो क्या करें?
Ans. निर्जला व्रत बहुत कठिन माना जाता है। यदि व्रत के दौरान अत्यधिक प्यास, कमजोरी, चक्कर या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। धार्मिक आस्था के नाम पर शरीर को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
Q9. एकादशी पर कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?
Ans. एकादशी पर भगवान विष्णु को फल, मखाना, दूध से बने सात्विक प्रसाद और अन्य फलाहारी सामग्री अर्पित की जा सकती है। तुलसी दल भगवान विष्णु की पूजा में विशेष महत्व रखता है।
Q10. अजा एकादशी का मतलब क्या होता है?
Ans. “अजा” भगवान विष्णु के एक नाम के रूप में भी प्रयुक्त होता है, जिसका अर्थ
अजन्मा या जन्म से रहित बताया जाता है। इसी कारण अजा एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना से जोड़कर देखा जाता है।
निष्कर्ष
भादो मास की अजा एकादशी व्रत कथा राजा हरिश्चंद्र के जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पौराणिक कथा है। यह कथा केवल व्रत के धार्मिक महत्व को नहीं बताती, बल्कि सत्य, धैर्य, संयम और भगवान के प्रति विश्वास की प्रेरणा भी देती है।
साल 2026 में अजा एकादशी
7 सितंबर, सोमवार को है और मथुरा के अनुसार इसका पारण
8 सितंबर की सुबह किया जाएगा।
इस पावन दिन भगवान विष्णु का स्मरण करें, अजा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें, अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें और जरूरतमंदों की सहायता करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक किया गया यह व्रत भक्त के जीवन में आध्यात्मिक शांति और भगवान विष्णु की कृपा का माध्यम बन सकता है।
जय श्री हरि विष्णु। 🙏
👉 हमारे
आने वाले कार्यक्रमों के बारे में जानें और कार्यक्रम में शामिल होकर पुण्य के भागी बनें। 🙏