हरतालिका तीज 2026 का व्रत इस वर्ष सोमवार, 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए किया जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की कामना से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं।
इस वर्ष हरतालिका तीज 2026 की तारीख को लेकर 13 और 14 सितंबर का भ्रम इसलिए दिखाई दे रहा है क्योंकि तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त हो रही है। पंचांग के अनुसार भारत में व्रत और पूजा के लिए 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज मनाना उचित माना गया है।
इस लेख में दी गई Hartalika teej 2026 से संबंधित तिथि, पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम और धार्मिक जानकारी गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के संस्थापक पुराण मनीषी पूज्य श्री कौशिक जी महाराज के मार्गदर्शन एवं जानकारी के आधार पर प्रस्तुत की गई है।
दिल्ली के अनुसार इस दिन हरतालिका पूजा का प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। हालांकि स्थान के अनुसार सूर्योदय का समय बदलने से पूजा मुहूर्त में भी कुछ अंतर हो सकता है।
इस लेख में जानिए Hartalika Teej 2026 date, हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त 2026, पूजा विधि, व्रत नियम, व्रत कथा, पूजा सामग्री, शुभ संयोग और अलग-अलग शहरों के पूजा समय की पूरी जानकारी।
हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का पर्व है। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके नए या साफ वस्त्र धारण करती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान गणेश की पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज को विशेष रूप से महिलाओं का महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। कई स्थानों पर विवाहित महिलाएं इसे अखंड सौभाग्य और पति के मंगल के लिए रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।
2026 में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
पंचांग गणना में तिथि का आरंभ और समाप्ति समय महत्वपूर्ण होता है, इसलिए केवल कैलेंडर की तारीख देखकर व्रत की तारीख तय करने के बजाय स्थानीय पंचांग देखना उचित रहता है।
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हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
दरअसल, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। यही कारण है कि इंटरनेट पर 13 और 14 सितंबर दोनों तारीखें दिखाई दे सकती हैं।
लेकिन भारत में हरतालिका तीज के व्रत और पूजा के लिए 14 सितंबर की तारीख प्रमुख है। इसी दिन सोमवार होने के कारण श्रद्धालु सुबह भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करेंगे।
इसलिए अगर आप “Hartalika Teej kab hai 2026” या “हरतालिका तीज 2026 कब है” खोज रहे हैं, तो सीधा उत्तर है—14 सितंबर 2026, सोमवार।
हिंदू पंचांग में किसी पर्व की तारीख केवल आधी रात से बदलने वाली सामान्य कैलेंडर व्यवस्था से तय नहीं होती। पर्व की गणना में तिथि, सूर्योदय और उस तिथि में किए जाने वाले धार्मिक कर्मों का समय महत्वपूर्ण होता है।
2026 में तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर अगले दिन यानी 14 सितंबर की सुबह समाप्त हो रही है। इसलिए कुछ जगहों पर 13 सितंबर का उल्लेख दिखाई देता है।
Hartalika Teej का पूजन प्रातःकाल किया जाता है और 14 सितंबर की सुबह तृतीया तिथि सूर्योदय के आसपास विद्यमान है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार तृतीया 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे तक रहेगी और इसी अवधि में सुबह का पूजा मुहूर्त 6:05 से 7:06 बजे तक है।
यही वजह है कि 2026 में 14 सितंबर को हरतालिका तीज मनाना अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक पंचांग-आधारित निष्कर्ष है।
Hartalika Teej 2026 का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन व्रती महिलाएं प्रातःकाल स्नान करके संकल्प लेती हैं और पूरे दिन श्रद्धा के साथ भगवान शिव तथा माता पार्वती की आराधना करती हैं।
परंपरा में यह व्रत कठिन उपवासों में गिना जाता है और कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला उपवास हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य रूप से सुरक्षित या उपयुक्त नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या, गर्भावस्था, उम्र या चिकित्सकीय सलाह जैसी परिस्थितियों में व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
व्रत के प्रमुख नियमों में पूजा से पहले स्नान, स्वच्छ वस्त्र धारण करना, शिव-पार्वती का पूजन, हरतालिका व्रत कथा सुनना या पढ़ना, मंत्र-जप और श्रद्धापूर्वक व्रत का पालन शामिल है।
हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त 2026 में प्रातःकाल का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त 2026 में प्रातःकाल का समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। 14 सितंबर 2026, सोमवार को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। प्रमुख शहरों में पूजा मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:
इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का संकल्प लेकर विधिवत पूजा, श्रृंगार सामग्री अर्पित करना, दीप-धूप जलाना और हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ किया जा सकता है।
Note: स्थानीय सूर्योदय के कारण अलग-अलग शहरों में पूजा के शुरुआती समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।

हरतालिका तीज पर मुख्य पूजा के लिए प्रातःकाल को प्राथमिकता दी जाती है। यदि किसी कारण से सुबह पूजा करना संभव न हो तो कुछ पंचांग परंपराओं में प्रदोषकाल में शिव-पार्वती पूजा का विकल्प भी बताया जाता है।
राहुकाल को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका समय शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर बदलता है। इसलिए पूरे भारत के लिए एक ही राहुकाल बताना सही नहीं होगा।
पूजा के महत्वपूर्ण संकल्प या शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए राहुकाल को देखकर समय तय करना बेहतर है।
2026 की हरतालिका तीज इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह पर्व सोमवार, 14 सितंबर को पड़ रहा है। इसी दिन पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी भी आरंभ हो रही है।
इस दिन तृतीया तिथि सुबह 7:06 बजे तक है और इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होती है। यही कारण है कि 14 सितंबर 2026 को धार्मिक कैलेंडर में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों का उल्लेख मिल रहा है।
ऐसे में यह दिन शिव-पार्वती आराधना के साथ गणेश पूजन के कारण धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को ही पड़ रही हैं, लेकिन दोनों पर्वों की तिथियां अलग हैं।
14 सितंबर की सुबह तक तृतीया तिथि रहती है। इसके बाद सुबह 7:06 बजे से चतुर्थी तिथि शुरू होती है, जो अगले दिन 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। इसलिए एक ही नागरिक कैलेंडर तारीख पर दोनों पर्वों का उल्लेख दिखाई देता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि दोनों व्रत या पूजन एक ही विधि से किए जाते हैं। हरतालिका तीज की पूजा शिव-पार्वती को समर्पित है, जबकि गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश की स्थापना और पूजा प्रमुख होती है।
Hartalika Teej भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से जुड़ा पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।
इसी तप और संकल्प की स्मृति में हरतालिका तीज पर महिलाएं श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। विवाहित महिलाएं दांपत्य सुख और परिवार के मंगल की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की कामना से व्रत करती हैं।
इस पर्व का मूल संदेश केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि संकल्प, भक्ति, त्याग और शिव-पार्वती के आदर्श दांपत्य से भी जुड़ा है।
हरतालिका तीज में निर्जला व्रत रखने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इसमें व्रती पूरे दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं करतीं और पूजा के बाद निर्धारित परंपरा के अनुसार व्रत पूर्ण करती हैं।
लेकिन निर्जला व्रत कठिन होता है। इसलिए इसे केवल धार्मिक परंपरा समझकर स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यदि किसी महिला को बीमारी, कमजोरी, गर्भावस्था, दवा लेने की आवश्यकता या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति है; स्वयं को नुकसान पहुंचाना इसका उद्देश्य नहीं है।
हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं, जबकि कुछ महिलाएं अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या हल्का भोजन लेकर व्रत करती हैं। इसलिए व्रत में क्या खाना चाहिए, यह व्यक्ति की परंपरा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि आप निर्जला व्रत रख रही हैं, तो व्रत के दौरान भोजन या पानी ग्रहण नहीं किया जाता। वहीं फलाहार करने वाली महिलाएं व्रत में सात्त्विक और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ ले सकती हैं।
यदि आपकी व्रत परंपरा में फलाहार की अनुमति है, तो इन चीजों का सेवन किया जा सकता है:
फलाहार करने वाली महिलाओं को सामान्यतः अनाज, दाल और सामान्य नमक जैसे उन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जिन्हें उनकी व्रत परंपरा में वर्जित माना जाता है। इसके अलावा बहुत अधिक तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार या भारी भोजन करने से भी बचना बेहतर है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्जला व्रत को केवल धार्मिक परंपरा के कारण अपनी स्वास्थ्य स्थिति की अनदेखी करके नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों, किसी बीमारी से पीड़ित लोगों या नियमित दवा लेने वालों को उपवास का निर्णय अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार लेना चाहिए। कमजोरी, चक्कर, अत्यधिक प्यास या तबीयत बिगड़ने जैसी स्थिति में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।
ध्यान दें: हरतालिका तीज के खान-पान के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने घर की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत का पालन करना उचित है।
हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि को सरल रूप में इस तरह समझा जा सकता है:
स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा की सामग्री और क्रम में थोड़ा अंतर हो सकता है।
हरतालिका तीज की पूजा के लिए जरूरी सामग्री पहले से तैयार कर लेना बेहतर रहता है, ताकि पूजा के समय किसी चीज के लिए भागदौड़ न करनी पड़े। पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ पूजा की चौकी और स्वच्छ कपड़े की आवश्यकता होती है। इसके अलावा जल, गंगाजल, रोली, अक्षत, चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धूप, दीप और नैवेद्य जैसी सामान्य पूजा सामग्री भी रखी जाती है।
मुख्य पूजा सामग्री:
सुहाग सामग्री में सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, कंघी, शीशा, वस्त्र और अन्य श्रृंगार सामग्री परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।

हरतालिका तीज पूजा विधि में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं प्रातः स्नान करके पूजा का संकल्प लेती हैं और विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर हरतालिका तीज के अवसर पर मिट्टी या रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है।
हरतालिका तीज पर पूजा करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। यदि आपके परिवार में मिट्टी की प्रतिमा बनाने की परंपरा है, तो उसी के अनुसार प्रतिमा तैयार कर सकते हैं।
पूजा का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है:
हरतालिका तीज की पूजा में सामग्री की संख्या से अधिक श्रद्धा और संकल्प को महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो तो उपलब्ध पूजा सामग्री से भी पूजा की जा सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि तथा सामग्री में थोड़ा अंतर हो सकता है।
यदि आप निर्जला व्रत रख रही हैं, तो अपनी स्वास्थ्य स्थिति का विशेष ध्यान रखें। बीमारी, गर्भावस्था, कमजोरी या नियमित दवा लेने की स्थिति में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करके कठिन उपवास करना उचित नहीं है।
हरतालिका तीज की पूजा का मुख्य भाव भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण, भक्ति, संकल्प और परिवार के मंगल की प्रार्थना है।
हरतालिका तीज की कथा माता पार्वती के तप और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के उनके संकल्प से जुड़ी है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। उनके पिता हिमवान उनकी इच्छा के अनुसार विवाह करने को लेकर तैयार नहीं थे और माता पार्वती के विवाह का संबंध भगवान विष्णु से जोड़ने की बात सामने आई।
माता पार्वती की एक सखी उनके मन की इच्छा जानती थीं। कथा के अनुसार सखी उन्हें वहां से एक वन में ले गईं, ताकि उनकी इच्छा के विपरीत विवाह न हो। इसी कारण इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा—जहां “हरत” का संबंध हरकर ले जाने और “आलिका” का अर्थ सखी से जोड़ा जाता है।
वन में माता पार्वती ने कठोर तप किया और शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उपवास एवं आराधना की। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में महिलाएं हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अपने दांपत्य जीवन की मंगलकामना करती हैं।
हरतालिका तीज का केंद्र भगवान शिव और माता पार्वती हैं। शिवजी को वैराग्य, शक्ति और चेतना के प्रतीक तथा माता पार्वती को शक्ति, प्रेम और समर्पण का स्वरूप माना जाता है।
इसलिए इस दिन दोनों की संयुक्त पूजा को दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
पूजा के समय केवल मनोकामना मांगने के बजाय परिवार में प्रेम, सद्भाव, संयम और सेवा की भावना बनाए रखने का संकल्प लेना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप है।
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हरतालिका तीज पर माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इसमें सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, वस्त्र और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल की जाती है।
विवाहित महिलाएं माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य की भावना से श्रृंगार सामग्री अर्पित करती हैं। इसके बाद सुहाग सामग्री का दान या किसी जरूरतमंद महिला को उपयोगी वस्तुएं देना भी सेवा की भावना से किया जा सकता है।
हरतालिका तीज की एक विशेष परंपरा मिट्टी या रेत से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करना है।
इस परंपरा का संबंध माता पार्वती की तपस्या से जोड़ा जाता है। पूजा के लिए बनाई गई प्रतिमाएं इस बात का प्रतीक हैं कि भक्ति और संकल्प के लिए भव्य साधनों से अधिक श्रद्धा महत्वपूर्ण है।
यदि आपके परिवार या क्षेत्र में मिट्टी की प्रतिमा बनाने की परंपरा है, तो पूजा से पहले इसे स्वच्छ स्थान पर तैयार करके विधिपूर्वक स्थापित किया जा सकता है।
हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पूजा के दौरान सरल मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
भगवान शिव का मंत्र:
“ॐ नमः शिवाय”
माता पार्वती का मंत्र:
“ॐ पार्वत्यै नमः”
इसके अलावा श्रद्धालु “ॐ उमायै नमः” का भी जाप कर सकते हैं।
मंत्रों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता है। अपनी परंपरा के अनुसार शिव चालीसा, पार्वती स्तुति या अन्य स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को श्रद्धा के अनुसार विभिन्न पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। पूजा से पहले सभी सामग्री तैयार कर लेने से पूजा के समय किसी चीज की कमी नहीं रहती।
भगवान शिव को परंपरा के अनुसार निम्न सामग्री अर्पित की जा सकती है:
माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इसमें शामिल हो सकते हैं:
पूजा सामग्री में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए उपलब्ध सामग्री के अनुसार श्रद्धापूर्वक पूजा करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
हरतालिका तीज की पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।
हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला रखती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा के बाद व्रत पूर्ण करती हैं। व्रत खोलने का समय हर क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग और परिवार की मान्यता को ध्यान में रखना बेहतर होता है।
व्रत खोलते समय इन बातों का ध्यान रखें:
हरतालिका तीज 2026 सोमवार को पड़ रही है और इसी दिन तृतीया तिथि सुबह तक विद्यमान रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ होगी।
हालांकि किसी विशेष शुभ योग या ग्रह-नक्षत्र के प्रभाव को लेकर निष्कर्ष निकालते समय स्थान, लग्न और स्थानीय पंचांग की गणना को ध्यान में रखना चाहिए। सामान्य पर्व की जानकारी और व्यक्तिगत कुंडली आधारित ज्योतिषीय फल एक जैसी चीजें नहीं हैं।
इसलिए केवल किसी राशि के आधार पर यह कहना कि व्रत रखने से निश्चित रूप से कोई विशेष परिणाम मिलेगा, उचित नहीं होगा। धार्मिक मान्यताओं को उसी रूप में समझना अधिक सही है।
Ans. हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़े महत्वपूर्ण पर्व हैं, लेकिन दोनों की तिथि और धार्मिक परंपराएं अलग हैं। हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। हरतालिका तीज माता पार्वती की कठोर तपस्या और शिवजी को पति रूप में प्राप्त करने की कथा से विशेष रूप से जुड़ी है।
Ans. हरतालिका तीज पर हरे, लाल, गुलाबी, पीले या अन्य शुभ माने जाने वाले रंगों की साड़ी पहनने की परंपरा कई स्थानों पर है। हरा रंग विशेष रूप से तीज पर्व से जुड़ा माना जाता है, जबकि लाल और गुलाबी रंग भी सुहाग एवं शुभता के प्रतीक के रूप में पसंद किए जाते हैं। हालांकि किसी एक रंग को अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए; परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार वस्त्र चुने जा सकते हैं।
Ans. तीज के अलग-अलग पर्वों का महत्व उनकी परंपरा और क्षेत्र के अनुसार अलग होता है। हरतालिका तीज को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना तथा माता पार्वती की कठोर तपस्या की कथा से जुड़ा है। इसे कई स्थानों पर महिलाओं के प्रमुख व्रतों में गिना जाता है।
Ans. परंपरागत रूप से हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं, यानी पूरे व्रत के दौरान पानी भी नहीं पीतीं। लेकिन निर्जला व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से कठिन हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति के लिए ऐसा उपवास उपयुक्त नहीं है तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहिए और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
Ans. अविवाहित लड़कियां हरतालिका तीज को धार्मिक मान्यता के अनुसार अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से रखती हैं। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसलिए उनके तप और संकल्प को इस व्रत से जोड़ा जाता है।
Ans. हरतालिका तीज के दिन पूजा से पहले स्नान करना सामान्य धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। बाल धोने को लेकर अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए यदि आपके घर में कोई विशेष परंपरा है तो उसी के अनुसार चलना उचित है। धार्मिक व्रत के सामान्य नियमों में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया जाता है।
Ans. हां, कई महिलाएं हरतालिका तीज पर निर्जला उपवास रखती हैं और पूरे दिन भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करती हैं। हालांकि निर्जला व्रत अनिवार्य रूप से सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। स्वास्थ्य समस्या होने पर व्रत का स्वरूप अपनी स्थिति के अनुसार रखना चाहिए।
Ans. हरतालिका तीज व्रत के प्रमुख नियमों में प्रातः स्नान, स्वच्छ वस्त्र धारण करना, व्रत का संकल्प लेना, शिव-पार्वती की पूजा करना, सुहाग सामग्री अर्पित करना, व्रत कथा पढ़ना या सुनना, मंत्र-जाप करना और श्रद्धापूर्वक उपवास करना शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में नियमों में कुछ अंतर हो सकता है।
Ans. यदि किसी कारण से व्रत टूट जाए तो घबराने के बजाय भगवान शिव और माता पार्वती से श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। शेष पूजा विधि को यथासंभव पूरा किया जा सकता है। यदि व्रत स्वास्थ्य कारणों से टूटा है तो दोबारा निर्जला उपवास रखकर स्वयं को कष्ट देना उचित नहीं है। धार्मिक कर्मकांड में परिवार की परंपरा या विद्वान पंडित की सलाह भी ली जा सकती है।
Ans. हरतालिका तीज पर साड़ी या वस्त्र का दान कई परिवारों में शुभ और सेवा भाव से जुड़ा माना जाता है। जरूरतमंद महिला को वस्त्र देना दान और सहयोग की भावना को बढ़ाता है। इसे केवल धार्मिक फल की अपेक्षा से नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और जरूरतमंद की सहायता के भाव से करना अधिक सार्थक माना जा सकता है।
हरतालिका तीज केवल एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि माता पार्वती की तपस्या, संकल्प और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति को स्मरण करने का अवसर है। इस दिन पूजा के साथ जरूरतमंदों की सहायता, वस्त्र या अन्न का दान, गौसेवा और सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य भी किए जा सकते हैं।
यदि आप व्रत रख रही हैं तो सुबह से ही मन को शांत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।
हरतालिका तीज 2026 का सार:
📅 तारीख — 14 सितंबर 2026, सोमवार
🌙 तिथि — भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया
⏰ तृतीया समाप्त — 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे
🙏 दिल्ली पूजा मुहूर्त — सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक
🕉️ आराध्य — भगवान शिव और माता पार्वती
🌸 मुख्य भाव — भक्ति, संकल्प, दांपत्य सुख और मंगलकामना
👉 हमारे आने वाले कार्यक्रमों के बारे में जानें और कार्यक्रम में शामिल होकर पुण्य के भागी बनें। 🙏